संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। तहसील क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित जन्नतुलबकी परिसर में बृहस्पतिवार रात अंजुमन फेदा-ए-कमरे बनी हाशिम के तत्वावधान में अलविदाई शब्बेदारी का आयोजन हुआ। पूरी रात चले धार्मिक कार्यक्रम में मरसिया, मजलिस और नौहा-मातम के दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। शब्बेदारी की शुरुआत तिलावत-ए-कलाम पाक से हुई। इसके बाद शाहिद आलम व उनके सहयोगियों ने मरसिया पढ़कर करबला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की। मजलिस को संबोधित करते हुए जाकिर जमाल हैदर रिजवी ने हजरत इमाम हुसैन और करबला के शहीदों के मसायब बयान किए और उनके त्याग, सब्र और इंसानियत के संदेश पर प्रकाश डाला।
मजलिस के उपरांत अंजुमन फेदा-ए-कमरे बनी हाशिम, अंजुमन फरोग मातम और अंजुमन गुलदस्ता मातम के मातमी दस्तों ने अलविदाई नौहा पढ़ते हुए पूरे जोशो-खरोश के साथ मातम किया। देर रात तक नौहाख्वानी और मातमी सोज से पूरा परिसर गमगीन माहौल में डूबा रहा।
कार्यक्रम के समापन पर अंजुमन की ओर से साहिब-ए-बयाज, मरसिया खां और जाकिर को सम्मानित किया गया। संचालन मशहूर शायर बेताब हल्लौरी ने किया।
इस अवसर पर नफीस सैयद, कायनात, फरहान, कमर अखलाख, मुमताज, आले रजा सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।न