सिद्धार्थनगर। भीषण गर्मी में अब खतरा सिर्फ लू और धूप तक सीमित नहीं है। घरों की छतों पर रखी पानी की टंकियां तपकर सीधे सेहत पर वार कर रही हैं। दोपहर में नलों से निकलने वाला पानी इतना गर्म हो जा रहा है कि नहाना तक मुश्किल हो रहा है, पर मजबूरी में लोग इसी पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। डॉक्टर इसे स्लो पॉइजनिंग जैसा खतरा मान रहे हैं।
जिले में इन दिनों तापमान 42 डिग्री के आसपास बना हुआ है। दोपहर के वक्त टंकियों का पानी 45-50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। नौगढ़, बांसी और आसपास के इलाकों में लोगों का कहना है कि सुबह 10 बजे के बाद नल खोलते ही उबलता हुआ पानी निकलता है।
शहर के नई बस्ती निवासी रामकुमार ने बताया, दोपहर में पानी इतना गर्म हो जाता है कि बच्चों को नहलाना मुश्किल हो जाता है। पहले ठंडा करना पड़ता है, तब इस्तेमाल करते हैं। वहीं, बांसी की गृहिणी संगीता देवी कहती हैं, नहाने के बाद शरीर में खुजली और जलन बढ़ गई है। डॉक्टर ने ठंडे पानी से नहाने की सलाह दी है, लेकिन टंकी का पानी ही गर्म मिल रहा है।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. गौरव दुबे का कहना है। अत्यधिक गर्म पानी से नहाने पर त्वचा की नमी खत्म होती है, जिससे खुजली, एलर्जी और इंफेक्शन के मामले बढ़ते हैं। गर्म पानी पीने से गले और पाचन तंत्र पर भी असर पड़ सकता है। त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. राम प्रकाश बताते हैं, गर्मी में पहले ही त्वचा संवेदनशील रहती है। ऐसे में गर्म पानी से नहाना स्किन डैमेज को और बढ़ा देता है, वहीं बालों की जड़ें भी कमजोर होती हैं।