सिद्धार्थनगर। बिस्तर पर लेटकर मोबाइल चलाना आजकल युवाओं की आम आदत बन गई है। अब ये आदत धीरे-धीरे एक छिपी बीमारी का रूप ले रही है। आराम के लिए अपनाई गई यह आदत शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है। स्थानीय चिकित्सकों के अनुसार पिछले कुछ समय में ‘टेक्स्ट नेक’ और नींद से जुड़ी समस्याओं के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। इसमें बड़ी संख्या युवाओं की है, जो लंबे समय तक मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, लेटकर मोबाइल चलाने से शरीर की पोजीशन असंतुलित हो जाती है, जिससे गर्दन, कंधे और रीढ़ की हड्डी पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने से ‘टेक्स्ट नेक’ जैसी समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिसमें गर्दन में दर्द, अकड़न और झुकाव की समस्या हो जाती है।
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. विमल द्विवेदी का कहना है कि मोबाइल को आंखों के बेहद करीब रखकर इस्तेमाल करने से आंखों पर सीधा असर पड़ता है। इससे जलन, धुंधलापन, सिरदर्द और ‘ड्राई आई’ जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। खासकर रात के समय स्क्रीन की रोशनी आंखों और दिमाग दोनों को प्रभावित करती है।
नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर असर
- न्यूरो सर्जन डॉ. आशुतोष शुक्ल बताते हैं कि देर रात तक मोबाइल स्क्रॉल करने की आदत नींद के पैटर्न को बिगाड़ रही है। इससे न सिर्फ नींद पूरी नहीं हो पाती बल्कि मानसिक थकान, चिड़चिड़ापन और एंग्जायटी जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। कई युवा देर रात तक जागने के कारण दिनभर सुस्ती और फोकस की कमी महसूस करते हैं।
क्या करें बचाव
- लेटकर मोबाइल चलाने से बचें, बैठकर सही पोजीशन में इस्तेमाल करें
- हर 20-30 मिनट पर ब्रेक लें
- सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल का इस्तेमाल बंद करें
- आंखों और गर्दन को आराम देने के लिए हल्की एक्सरसाइज करें
(डॉ. आशुतोष शुक्ल के अनुसार)