फरीदकोट के सरकारी इन सर्विस सेंटर में पौधे लगाती शिक्षा विभाग की सीईओ बलजीत कौर व अन्य।
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सिद्धार्थनगर। शासन के निर्देश के बावजूद जिले के अंदर शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में पड़ी है। महीनों बाद भी विभागीय स्तर पर कोई हलचल न होने से शिक्षक मायूस हैं। अफसरों की मनमानी शासन के निर्देशों पर भारी है। शिक्षकों को चिंता सता रही है कि कहीं इधर लेटलतीफी के चलते तबादले में आचार संहिता रोड़ा न अटका दे।
अंतरजनपदीय तबादले के बाद शासन ने जिले के अंदर शिक्षकों के कार्यक्षेत्र में बदलाव के निर्देश दिए थे। जिला प्रशासन के निर्देशन में तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों के समायोजन-स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी करने को कहा था। शासन की इस कवायद से न सिर्फ दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों को राहत मिलती, बल्कि हार्ड और साफ्ट ब्लाक के चलते शिक्षकों की कमी भी दूर होती। आचार संहिता को देखते हुए इस पूरी प्रक्रिया को शीघ्र पूरी करने को कहा गया था। इससे इतर जिले में सारी गतिविधियां ठप पड़ी है।
सूत्रों की मानें कमेटी में शामिल प्रशासनिक अफसरों के रुचि न लेने से यह स्थिति बनी हुई है। तबादले में देरी से शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्हें यह चिंता सता रही है कि देरी के चलते अब कहीं आचार संहिता का रोड़ा न अटक जाए। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के जिलाध्यक्ष इंद्रजीत यादव का कहना है कि शिक्षक 80 से 90 किमी दूर जाकर शिक्षण कार्य कर रहा हैं। जिससे लोगो को काफी दिक्कत होती हैं। सरकार शिक्षकों के परेशानी को देखते हुए चार माह पहले ही स्थानांतरण आदेश दिया था, उसके बाद भी दो आदेश आया, लेकिन जिले के जिम्मेदार अधिकारी सो रहे हैं।
तीन बार स्थानांतरण को लेकर ज्ञापन भी दिया गया, लेकिन कुछ नहीं किया जा रहा है, जबकि कई जनपदों में स्थानांतरण प्रकिया पूरी कर ली गई हैं। कभी भी चुनाव का अधिसूचना जारी हो सकती हैं, लेकिन किसी को शिक्षकों के हितों से कोई मतलब नही हैं। उधर, बीएसए अरविंद कुमार पाठक का कहना था कि तबादला प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए वह लगे हुए हैं। व्यस्तताओं के चलते पूरा काम नहीं हो पा रहा। जल्द ही नियमों के तहत तबादला कर दिया जाएगा।