संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। संत के अपमान का परिणाम बहुत ही घातक होता है, जिसका प्रायश्चित संभव नहीं है। यह विचार बृहस्पतिवार को ब्लाॅक क्षेत्र के उजैनियां में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा वाचक आचार्य उत्तम कृष्ण शास्त्री ने व्यक्त किए। उन्हाेंने नारद चरित्र के साथ ही शुकदेव जन्म की कथा का रसपान कराया।
कथा वाचक ने बताया कि जिस प्रकार राजा परिक्षित ने कलयुग के वशीभूत होकर संत का अपमान कर दिया, उसका परिणाम महाराज परीक्षित को श्राप लगा। संत को पहचानने में अगर भूल हो जाए तो भयंकर परिणाम होता है, इसका प्रायश्चित संभव नहीं है। मानव को संत,भक्त व ब्राह्मण का सदैव सम्मान करना चाहिए उनका सदैव आशीर्वाद ग्रहण करना चाहिए।
इस दौरान पं. शशिकांत शास्त्री, इंद्रजीत शास्त्री, विनीत शास्त्री, रमेश शास्त्री, दिनेश चंद्र मिश्र, बब्लू मिश्र, गुड्डू मिश्र, रामकुमार, राम नरेश, जय प्रकाश उर्फ रिंकू तिवारी, गोबरे, अलगू, तुला राम आदि मौजूद रहे।
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