सिद्धार्थनगर। गेहूं की सिंचाई चल रही है, लेकिन नहरें बेपानी हैं। इससे किसान फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि दिसंबर माह में दो दिन ख्वाब दिखाने के लिए नहर आई और फिर पानी बंद हो गया है। अब फसल बर्बाद हो रही है, कैसे सिंचाई करें समझ में नहीं आ रहा है। जिम्मेदार समस्या को लेकर बेखबर है।
बानगंगा नहर से कई माइनर निकली हुई। इसमें देवकलीगंज माइनर, कटया, चिल्हिया माइनर, अहिरौली माइनर, चौरासी माइनर, सिसरिया और जोगिया के साथ अन्य माइनर निकली हुई। इससे लगभग 20 हजार हेक्टेयर फसल की सिंचाई होती है। दिसंबर माह के आखिरी सप्ताह में हर वर्ष पानी छोड़ा जाता है जो 10 दिन तक चलता है। लेकिन इस बार केवल दो दिन ही सही से पानी चला और नहर बंद हो गई। इससे 60 प्रतिशत किसान गेहूं की सिंचाई नहीं कर पाए हैं। अब उन्हें किराए के पंपिंग सेट से सिंचाई करना पड़ रहा है।
सिसवा बुजुर्ग गांव निवासी किसान रुदल प्रसाद और लौटन ने कहा कि उनका खेत चौरासी माइनर से उनकी खेत की सिंचाई होती है। इस बार नहर दिसंबर माह में आई और मात्र दो दिन ही पानी रहा। जबतक सिंचाई के लिए सोंचते पानी बंद हो गई। अब किराये पर पंपिंग सेट लगाने पर एक बीघा में चार से पांच घंटे लग रहा है। जिसका किसानों को 300 रुपये प्रति घंटे पर किराया देना पड़ रहा है। प्रति बीघा 1200-1500 रुपये लग रहा है। वह भी जिनके खेत में बोरिंग और पास में गड्डा है वह सिंचाई कर पा रहे हैं। अन्य लोग अभी भी नहर के भरोसे बैठे है। अगर पानी जल्द नहीं छोड़ा गया तो फसल बर्बाद हो जाएगी। इस संबंध में अधिशासी अभियंता आरके नेहरा ने बताया कि पानी की कमी के कारण बंद किया गया था। जल्द ही पानी छोड़ दिया जाएगा।
पानी नहीं छोड़ा तो करेंगे विरोध प्रदर्शन
जोगिया ब्लॉक के पूर्व प्रमुख रामदेव कनौजिया ने नहर में पानी छोड़ने के लिए विभाग के अभियंता को शिकायती पत्र दिया है। उन्होंने कहा है कि नहर में सिल्ट की सफाई में गड़बड़ी को छिपाने के लिए दो दिन पानी छोड़ा गया था। जबकि पानी की किसानों को बहुत जरूरत है। अगर जल्द पानी नहीं छोड़ा गया तो किसान विरोध पर उतर आएंगे।