सिद्धार्थनगर। परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों को मोबाइल की दुनिया से निकालकर किताबों से जोड़ने के लिए नए शैक्षिक सत्र में ''''''''ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड (डीईएआर)'''''''' अभियान शुरू किया जाएगा। इसके तहत सप्ताह में एक दिन निर्धारित समय पर सभी छात्र-छात्राएं 30 मिनट तक पाठ्यपुस्तकों से अलग अपनी पसंद की कहानी, कविता, जीवनी, बाल साहित्य या अन्य रोचक पुस्तकें पढ़ेंगे। इस दौरान शिक्षक भी बच्चों के साथ बैठकर पढ़ेंगे ताकि विद्यालय में पढ़ने का अनुकूल माहौल तैयार हो सके। अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करना, भाषा कौशल को मजबूत बनाना और बढ़ते मोबाइल स्क्रीन टाइम को कम करना है।
बेसिक शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक विद्यालय अपनी समय-सारिणी में सप्ताह में एक दिन पुस्तकालय के लिए अलग कालांश निर्धारित करेगा। जिन विद्यालयों में पुस्तकालय उपलब्ध हैं वहां पुस्तकालय की पुस्तकों का अधिक से अधिक उपयोग कराया जाएगा। जिन विद्यालयों में पुस्तकालय सीमित हैं, वहां उपलब्ध पुस्तकों, समाचार पत्रों और अन्य पठन सामग्री का उपयोग किया जाएगा। शिक्षकों को भी बच्चों के साथ पढ़ने और समय-समय पर पढ़ने-लिखने से जुड़ी गतिविधियां कराने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षा विभाग का मानना है कि मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों पर बढ़ता समय बच्चों की एकाग्रता, भाषा क्षमता और रचनात्मक सोच को प्रभावित कर रहा है। इसी कारण विद्यालयों में समाचार पत्र पढ़ने, रीडिंग क्लब बनाने और नियमित पठन गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जब बच्चे अपनी रुचि की किताबें पढ़ेंगे तो उनमें पढ़ने की स्वाभाविक रुचि विकसित होगी और उनकी कल्पनाशक्ति और अभिव्यक्ति क्षमता भी बेहतर होगी।
सिद्धार्थनगर के परिषदीय विद्यालयों में भी इस अभियान को तेज करने की तैयारी शुरू हो गई है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के निर्देशन में विद्यालयों को पुस्तकालय की उपलब्ध पुस्तकों का उपयोग बढ़ाने, बच्चों को कहानी और कविता की किताबें उपलब्ध कराने और नियमित पठन गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि इससे बच्चों की शब्दावली बढ़ेगी, पढ़ने की गति में सुधार होगा और कक्षा में उनकी सहभागिता भी बढ़ेगी।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार नियमित पठन की आदत बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ लेखन क्षमता और तार्किक सोच को भी मजबूत करती है। यही कारण है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी विद्यालयों में ''''''''ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड'''''''' जैसी गतिविधियों को पढ़ने की संस्कृति विकसित करने का प्रभावी माध्यम माना गया है। पहले भी शिक्षा मंत्रालय की रीडिंग कैंपेन गाइडलाइन में विद्यालयों में निर्धारित समय पर सभी छात्रों और शिक्षकों के एक साथ पढ़ने की गतिविधि को शामिल किया गया था।
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बच्चों को होंगे ये फायदे
- भाषा और शब्द भंडार में वृद्धि।
- पढ़ने और समझने की क्षमता मजबूत होगी।
- कल्पनाशक्ति और रचनात्मक सोच का विकास।
- आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति क्षमता में सुधार।
- मोबाइल पर निर्भरता कम होगी और पुस्तकों से जुड़ाव बढ़ेगा।
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ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड (डीईएआर) अभियान का उद्देश्य बच्चों में नियमित रूप से पढ़ने की आदत विकसित करना है। इससे भाषा कौशल, शब्द भंडार, कल्पनाशक्ति और अभिव्यक्ति क्षमता का विकास होगा, साथ ही बच्चों का मोबाइल स्क्रीन टाइम कम करने में भी मदद मिलेगी। सभी विद्यालयों को शासन के निर्देशों के अनुसार इस गतिविधि का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
- शैलेश कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, सिद्धार्थनगर।