शहर के अशोक मार्ग पर उड़ रही धूल के बीच से आवागमन कर रहे लोग।
सिद्धार्थनगर। दीपावली पर पटाखा जलने से पहले ही हवा में प्रदूषण का जहर घुल रहा है। जिले की एक्यूआई 129 तक पहुंच गया है, जो एक सप्ताह के पहले की तुलना में 29 अंक का उछाल है। एक्यूआई 100 के पार जाना हवा की गुणवत्ता खराब माना जाता है। सुबह-शाम आसमान में धुंध की चादर होने से सांस के रोगियों की तकलीफें बढ़ सकती है। अभी दिवाली के बाद एक्यूआई के स्तर में बढ़ोतरी होे सकती है।
बुधवार को पूरे दिन धुंध छाया रहा और धूल के गुबार जैसी तस्वीर सामने आई। ग्रामीण क्षेत्र में धान की कटाई और मड़ाई का भी काम शुरू गया है। इससे धूल के गुब्बार उठ रहे हैं और हवा में नमी होने के कारण वह एक परत जैसा बना रहा है। वहीं, धुंध का असर सबसे ज्यादा खजुरिया रोड और अशाेक मार्ग पर देखा गया। दीपावली के बाद प्रदूषण और बढ़ने की आशंका है।
विशेषज्ञ इसे सेहत के लिए घातक बता रहे हैं, सांस के रोगियों को अधिक एहतियात बरतने की जरूरत है। उनका कहना है कि अगर सुबह-शाम टहलने के लिए मास्क लगाकर निकलें। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज की बात करें तो यहां भी सांस की बीमारी से जुड़े 5 से 10 रोगी ओपीडी में पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नमी बढ़ने से धूल के कारण धुंध छा रही है। तापमान में गिरावट से नमी बढ़ जाती है।
इस वजह से हवा में पाल्यूटेंट (प्रदूषण फैलाने वाले कारकों) का प्रसार धीमा हो जाता है, इससे उनका घनत्व बढ़ जाता है। उनके वायुमंडल की ऊपरी सतह में न जा पाने के कारण हवा प्रदूषित होती जाती है। निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल के अलावा वाहनों का धुआं, आग जलाने से प्रदूषण बढ़ जाता है। इसका असर शहर में नजर आ रहा है। ि