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अब प्राइवेट सावारी भरने के लिए ट्रेवेल एजेंसी का पंजीकरण अनिवार्य

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अब सवारी भरने के लिए ट्रैवेल एजेंसी का पंजीकरण अनिवार्य
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बिना पंजीकरण वाले वाहनों पर प्रशासन कसेगा शिकंजा
टिकट देने वाले प्राइवेट वाहनों को भरना होगा टैक्स
शासन के निर्देश पर जिले में एक हजार से अधिक वाहन आएंगे दायरे में
श्याम सुंदर तिवारी
सिद्धार्थनगर। अब निजी सवारी ढोने वाले वाहन बिना ट्रैवेल एजेंसी लाइसेंस लिए नहीं चल सकेेंगे। अब निजी टैक्सी, कैब, ट्रैवलर चलाने वालों के लिए ट्रैवेल एजेंसी का लाइसेंस अनिवार्य है। ट्रैवेल एजेंसी के पंजीकरण कराए बिना वाहन में सवारी भरना कानून अपराध माना जाएगा। नए नियम के तहत शासन ने बस, कार सहित चार पहिया वाहन जो बुकिंग में चलते हैं या फिर सवारी में चलते हैं तो उन्हें पंजीकरण कराना होगा। वाहन स्वामी एआरटीओ कार्यालय में पंजीकरण करा सकते हैं।
वाहनों से बढ़ते हादसे और अपराध की घटनाओं को देखते हुए सरकार यातायात नियम में नित नए परिवर्तन लागू कर रही है। जिससे अपराध पर लगाम लगे। नए नियम के तहत अब बुकिंग और सवारी में चलने वाली बस और चार पहिया वाहन के लिए ट्रैवेल एजेंसी बनना अनिवार्य कर दिया गया है। ट्रैवेल एजेंसी बनने के लिए मंडल अथवा संभागीय परिवहन कार्यालय में वाहन स्वामी को पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद ही वे अपने वाहन को सवारी या फिर बुकिंग में चला सकेंगे। ऐसा नहीं करके सवारी और बुकिंग का कार्य करते हुए पकड़े जाने पर परिवहन नियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। एआरटीओ आशुतोष शुक्ल ने बताया कि अब बुकिंग और सवारी भरने वाले वाहनों का ट्रैवेल पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। नियम का पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
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अपराध पर लगाम लगाने में कारगर होगा नियम
जानकारों का मानना है कि इन नियम को लागू करने के पीछे शासन का उद्देश्य है कि मौजूदा समय में बिना पंजीकरण के वाहनों से हादसे और अपराध भी हो रहे हैं। मगर रिकॉर्ड नहीं होने की वजह से कार्रवाई में दिक्कत आती है। अगर बुकिंग करने वाले और सवारी भरने वाले वाहन ट्रैवेल एजेंसी में पंजीकृत हो जाएंगे तो उनका रिकॉर्ड विभाग के पास रहेगा और हादसा या फिर कोई अन्य मामला सामने आने के बाद जांच में सहूलियत होगी।
ऑफलाइन होगा पंजीकरण
वाहन स्वामी को ट्रैवेल एजेंसी में पंजीकरण कराने के लिए सीधे एआरटीओ कार्यालय या फिर मंडलीय संभागीय परिवहन कार्यालय में जाना होगा। एआरटीए (रिजलन ट्रांसपोर्ट अथारटी) पर पंजीकरण होगा। इसके लिए वाहन स्वामी को पूरे कागजात को जमा करना होगा।
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जिले में चलते हैं एक हजार से अधिक वाहन
बुकिंग और सवारी में जिले में एक हजार से अधिक वाहन चलते हैं। इसमें 300 से अधिक बस होंगे। जबकि 700 तक बोलेरो सहित अन्य वाहन हैं। जो दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, गोरखपुर सहित अन्य शहरों के लिए चलते हैं। अब यह लोग नियम के दायरे में आएंगे।
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