हुदहुद और सूखे की मार से कराहते किसानों को मौसम के मिजाज ने फिर तगड़ा झटका दिया है। फरवरी में ही मार्च जैसे तापमान ने गेहूं के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। तेज हवा और 25 डिग्री सेंटीग्रेड से अधिक का तापमान तैयार होती गेहूं की फसल के लिए नुकसान दायक है।
कृषि विशेषज्ञ भी इससे इनकार नहीं कर रहे। उनके मुताबिक करीब 20 दिन बाद (मार्च द्वितीय पखवाड़ा) वाले इस मौसम में गेहूं के पौधों की वृद्धि प्रभावित होगी, जिसका असर उत्पादकता और गुणवत्ता पर पड़ना तय है। करीब 10 से 15 फीसदी तक गिरावट की आशंका है।लगातार तीन फसलों से मौसम किसानों का साथ नहीं दे रहा।
पहले हुदहुद में रबी की फसल बर्बाद हो गई, फिर सूखे ने खरीफ को चट कर लिया। मौजूदा रबी की फसल से किसानों को बड़ी आस थी। जिले के 1 लाख 62 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में गेहूं की बुवाई हुई है।
शुरुआती दौर में फसल की वृद्धि और मौसम देखकर किसानों को आस थी कि अबकी अच्छा उत्पादन मिलेगा। कृषि विभाग का भी अनुमान था कि 44.8 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से 7 लाख 16 हजार क्विंटल से अधिक गेहूं उत्पादित होगा। मगर मौसम की बेरुखी और कृषि संसाधनों की दगाबाजी ने सारी उम्मीदें तोड़ दी हैं।
आलम यह है कि गेहूं को जो तापमान 15-20 दिनों बाद मार्च में मिलना था, वह फरवरी में ही हो गया है। पिछले एक सप्ताह से लगातार 25 डिग्री के आसपास का तापमान और तेज हवाओं से गेहूं की फसल बुरी तरह प्रभावित हो रही है। नमी न मिलने से पौधों का पर्याप्त विकास नहीं हो पा रहा।
तेज हवाओं से फसल समय से पहले ही सूखने लगी है। यही हाल रहा तो मार्च के प्रथम सप्ताह से ही कटाई करनी पड़ेगी, जो उत्पादन और गुणवत्ता के लिहाज से अनुकूल नहीं है। फसल का यह हाल देख किसानों के माथे पर बल पडने लगे हैं। लगातार तीसरी फसल के चौपट होने की आशंका से उनके सामने गंभीर चुनौती खड़ी होती नजर आ रही है।