पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने, एसएमएस से उपस्थिति भेजने पर अंकुश, दूध का वितरण बंद कराने सहित अन्य मांगों को लेकर प्राथमिक शिक्षकों ने बुधवार को हड़ताल की।
स्कूल बंदकर जिलेभर के शिक्षक बीएसए कार्यालय एकत्रित हुए और धरना देकर मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय से कलेक्ट्रेट तक जुलूस भी निकाला।
जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर प्रदेश सरकार से शिक्षकों की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की। 15 मार्च तक समस्याएं दूर न होने पर 16 को लखनऊ में हल्ला बोलने का ऐलान किया।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर जिले के अधिकांश प्राथमिक स्कूल बुधवार को बंद रहे। शिक्षक सुबह ही बीएसए कार्यालय पर एकत्रित होकर धरने पर बैठ गए।
धरने को संबोधित करते हुए संघ के जिलाध्यक्ष राधेरमण त्रिपाठी ने कहा कि सपा की सरकार बनने के बाद शिक्षक वर्ग उत्साहित था। उम्मीद थी कि बेसिक शिक्षा से जुड़ी समस्याएं दूर हो जाएंगी।
चार वर्षों बाद ही हालात जस के तस हैं। शिक्षा का अधिकार कानून के प्रावधान के बावजूद शिक्षकों से चुनावी ड्यूटी कराई जा रही है।
बिना कन्वर्जन कॉस्ट में वृद्धि किए बच्चों में दूध का वितरण करने का फरमान दिया गया है, जो उचित नहीं है। जिला मंत्री योगेन्द्र प्रसाद पांडेय ने कहा कि अप्रैल 2005 या उसके बाद नियुक्त शिक्षकों को पुरानी पेंशन व्यवस्था से वंचित कर दिया गया है।
नई पेंशन व्यवस्था शिक्षकों के अनुकूल नहीं है। इसे रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति का विवरण एसएमएस से भेजने के फरमान को भी आपत्तिजनक बताया।
अंतर्जनपदीय स्थानातंरण चाहने वाले शिक्षकों के आवेदन का शीघ्र निस्तारण करने पर जोर दिया। धरना स्थल पर पहुंचे बीएसए अजय कुमार सिंह ने शिक्षकों की समस्याओं से शासन को अवगत कराने का आश्वासन दिया।
करीब दो बजे तक धरने के बाद शिक्षकों का जत्था जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट की ओर कूच कर गया। वहां मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपते हुए समस्या समाधान की मांग की।
धरना-प्रदर्शन में इंद्रजीत यादव, नसीम अहमद, करुणेश मौर्य, राजकिशोर शर्मा, अभय श्रीवास्तव, अनिल तिवारी, जावेद अहमद, लालजी यादव, उदयभान मिश्रा, गयानन्द मिश्रा, रामप्रताप, शैलेंद्र मिश्रा, रुपेश सिंह, अब्दुल रऊफ, सत्येन्द्र मिश्रा, दिनेश सिंह, इंद्रसेन, सुधाकर, धनंजय, अतुल आदि शामिल रहे।