सिद्धार्थनगर। संसद में केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी द्वारा टीईटी अनिवार्यता को लेकर दिए गए लिखित जवाब के बाद वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त बेसिक शिक्षकों में असमंजस और असुरक्षा बढ़ गई है। इस मुद्दे ने जिले में आंदोलन का रूप लेना शुरू कर दिया है। इस क्रम शिक्षकों ने मंत्री के बयान के विरोध में पुतला दहन किया।
बुधवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर बड़ी संख्या में शिक्षक बीएसए कार्यालय पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने नारेबाजी करते हुए मंत्री के बयान के विरोध में पुतला दहन किया तथा लिखित जवाब की प्रतियां जलाकर नाराजगी जाहिर की। प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष व जिलाध्यक्ष राधेरमण त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति उस समय की निर्धारित शैक्षणिक अर्हताओं के आधार पर हुई थी, जब टीईटी लागू नहीं था। ऐसे में वर्षों बाद नई अनिवार्यता लागू करना उनके अधिकारों और सेवा सुरक्षा के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि यह केवल परीक्षा का विषय नहीं बल्कि लाखों शिक्षकों की सेवा स्थिरता और सम्मान से जुड़ा सवाल है। यदि सरकार ने शीघ्र स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए तो असंतोष और गहराएगा। जिला मंत्री योगेंद्र पांडेय ने सरकार से शिक्षकों की चिंताओं को गंभीरता से लेने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पूर्व नियुक्त शिक्षकों को राहत देने संबंधी स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया गया तो वृहद स्तर पर आंदोलन छेड़ा जाएगा।
इस दौरान लालजी यादव, इंद्रसेन सिंह, शिवाकांत दूबे, सुधाकर मिश्र, करुणेश मौर्य, शैलेंद्र मिश्र, रामशंकर पांडेय, आनंद राय उपस्थित रहे।