- आठ जुलाई से प्रभावी ऑनलाइन हाजिरी का शिक्षकों ने किया विरोध, नहीं शुरू की प्रक्रिया
- शिक्षकों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
- पहले दिन विफल रहा सरकार का निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। परिषदीय शिक्षकों के आनलाइन उपस्थिति समेत छह समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के सदस्य सोमवार को बड़ी संख्या में कलक्ट्रेट पहुंचकर धरना प्रदर्शन किया। वक्ताओं ने कहा कि विभाग पहले शिक्षक समस्याओं का समाधान हो फिर वे ऑनलाइन हाजिरी देंगे।
जिलाध्यक्ष आदित्य शुक्ल ने कहा कि उच्चाधिकारियों के नित नए व अव्यवहारिक फरमान के कारण शिक्षकों में रोष है। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालयों पर मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं, फिर भी अधिकारी जबरदस्ती अध्यापकों को ऑनलाइन हाजिरी के लिए बाध्य कर रहे हैं, जो न्यायोचित नहीं है। इससे शिक्षकों का मनोबल गिर रहा है। महामंत्री पंकज त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षकों को मात्र 14 आकस्मिक अवकाश मिलता है। इसमें पूरे वर्ष के जरूरी कार्य निपटाने होते हैं, जो बहुत कम है। उपार्जित अवकाश भी शिक्षकों को नहीं मिलता है। ऐसे में ऑनलाइन हाजिरी जैसा काला कानून अध्यापकों के लिए अभिशाप साबित होगा।
संघ के कोषाध्यक्ष अभय सिंह ने शिक्षकों को राज्य कर्मचारी का दर्जा देते हुए उन्हें सभी सुविधाएं देने,अंतर्जनपदीय स्थानान्तरण, वर्षों से लंबित पदोन्नति, एमडीएम से अध्यापकों को अलग करने की मांग की है। संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित मांग पत्र एडीएम उमाशंकर को सौंपा। इस दौरान विपुल सिंह, शिवपाल सिंह, जेपी गुप्ता, मनोज त्रिपाठी, हरिशंकर सिंह, सुरेंद्र गुप्ता, धर्मेंद्र श्रीवास्तव, राकेश पांडेय, संतोष पांडेय, मुक्तनाथ यादव, विजय भाष्कर, किरन उपाध्याय, संचिता, रेनू आदि मौजूद रहीं।