बिस्कोहर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के तत्वावधान में चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ अभियान के तहत मंगलवार को भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के भलुहिया गांव में किसान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के तरफ से आयोजित इस कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने, प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग और टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित किया।
केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि एक जून से शुरू हुए इस अभियान के अंतर्गत जनपद में वैज्ञानिकों की तीन टीमें अब तक 100 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर चुकी है। इन शिविरों के माध्यम से किसानों को मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक व जैविक खेती, उन्नत सब्जी उत्पादन और पशुपालन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। प्रसार वैज्ञानिक डॉ. शेष नारायण सिंह ने पराली और फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण और भूमि की उर्वरा शक्ति को होने वाले नुकसान के प्रति सचेत किया। उन्होंने अवशेषों को खेत में ही सड़ाकर जैविक खाद में बदलने की सलाह दी।
वहीं, डॉ. सर्वजीत ने खेती की लागत घटाने के लिए जैव उर्वरकों, हरी खाद और ट्राइकोडर्मा से बीज शोधन करने पर जोर दिया। मृदा वैज्ञानिक डॉ. प्रवेश कुमार देहाती ने कहा कि अंधाधुंध रासायनिक खादों के प्रयोग से मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है। किसान नियमित रूप से मिट्टी की जांच कराएं और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार ही खादों का प्रयोग करें। उद्यान वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने मचान विधि से सब्जी उत्पादन और फसल विविधीकरण को किसानों की आय बढ़ाने का बेहतर जरिया बताया।
पशु वैज्ञानिक डॉ. सुनील सिंह ने कृषि के साथ-साथ पशुपालन अपनाने पर बल देते हुए संतुलित आहार, समय पर टीकाकरण और स्वच्छता प्रबंधन के टिप्स दिए। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण किया। इस अवसर पर घनश्याम पाठक, राकेश पाठक, बसंत श्रीवास्तव, विश्राम विश्वकर्मा, विजय श्रीवास्तव, सचिन पाठक आदि मौजूद रहे।