सिद्धार्थनगर। जानलेवा बीमारी टीबी के रोकथाम के लिए सरकार ने विभिन्न उपाय किये है, इसके बावजूद टीबी पर नियंत्रण नही लग रहा हैं। इस वर्ष 2392 मरीजों की खोज की जा चुकी है। देश से क्षय रोग को खत्म करने के लिए चलाए जा रहे अभियान को स्वास्थ्य विभाग की टीम सफलता नही पा रही है। जबकि जिले में 137 एमडीआर के मरीज भी मिल चुके है।
टीबी के मरीजों की खोज करने के बावजूद भी जिला टीबी रोग के मामले में 62 वे नंबर पर है। जिले में लगभग 4600 से अधिक टीबी के मरीज है बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 2392 मरीजों को खोजने में सफल हो पाई है। जिसमें से 265 मरीज निजी चिकित्सालयों ने खोजा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम को वर्ष 2023 में 5300 मरीजों को खोजने का लक्ष्य दिया है। मरीजों की खोज कर दवा करना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। जबकि निजी अस्पतालों की ढ़ग से मॉनीटरिंग न होने से टीबी मरीजों का पता नही चल पा रहा है। जिससे प्राइवेट अस्पतालों पर दवा कराने वाले मरीजों को दवा महंगी पड़ने की वजह से वह बीच में ही दवा बंद कर दे रहे हैं। जिससे उनके लिए यह बीमारी घातक साबित हो रही है, और लोगों की जान जाने का भी खतरा बन रहा है। ऐसे में सरकारी स्वास्थ्य विभाग की टीम मरीजों को खोज कर फ्री में इलाज कर रही है। जिले में अभी भी 1694 रोगी टीबी की दवा करा रहे हैं।
एमडीआर के रोगी साबित हो रहे है घातक
एमडीआर से ग्रसित मरीज के साथ रहने वाले व्यक्ति को भी सीधे एमडीआर ही हो रहा है। ऐसे में मरीजों को बच कर रहना चाहिए। जब किसी व्यक्ति को तीन दिन से अधिक खासी आये तो ऐसे व्यक्ति को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच करवानी चाहिए। यदि उसमें टीबी के लक्षण नजर आ रहें है तो तुरंत उसका इलाज कराना चाहिए।