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गुरु के मार्गदर्शन से ही मिलती है सफलता

Mon, 28 Mar 2016 11:44 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सिद्धार्थनगर
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शोहरतगढ़ में चल रही रामकथा में उमड़े भक्त। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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गुरुके मार्ग दर्शन में जीवन सफल हो सकता है। सप्तऋषि गुरू की बात मानकर माता पार्वती ने भगवान शंकर से विवाह रचा लिया। जिन्हें गुरुजनों पर भरोसा नहीं, वह सपने में भी कामयाबी हासिल नहीं कर सकते है।
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उक्त उद्गार अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक संत विजय कौशलजी महाराज ने व्यक्त किया। वीरेंद्र ग्रामीण स्टेडियम छतहरी में चल रहे संगीतमय भव्य श्रीराम कथा के दूसरे दिन संत कौशलजी ने कहा कि जब माता पार्वती तपस्या कर रही थी। तब उन्हें शंकर भगवान अच्छे नहीं लगते थे, लेकिन जब उनके गुरूओं ने शंकर भगवान की अच्छाईयों को बताया। तब पार्वती ने कहा कि ब्याह तो भगवान शंकर से होगी नहीं तो कुंवारी ही रह जाउंगी।

भगवान शंकर के विवाह की अद्भुत लीला लोग बड़े ही ध्यान से सुनते रहे। संत विजय कौशल ने बताया कि शंकर जी का विवाह तय हुआ तो उन्हें तो जानकारी ही नहीं थी, लेकिन सारे देवता बारात में जाने के लिए स्वार्थ के वशीभूत होकर केवल अपनी ही तैयारियों में लग गए। भगवान शंकर को नंग-धडंग भूत गणों ने श्रृंगार किया।
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भगवान शंकर का विवाह जिस प्रकार हुआ था। उस प्रकार दोबारा इस धरती पर न ही कभी हुआ है और न ही कभी होगा। उन्होंने बताया कि भूतगणों में शादी में माला की जगह सांप लटका कर माला की पूर्ति की गई। तो दूसरे भूतगण ने हल्दी की जंगल भष्म लगा दिया।

चौथे ने अच्छे कार्यों में कोई बाधक न बने इसके लिए तीन बार थूक कर टोटका मिटाया। एक ने जलते हुए लकड़ी के कोयले को कूट कर भगवान को तिलक लगा दिया। हल्दी शरीर को सुंदर बनाता है, भष्म शरीर को ठंडा करता है। भगवान शंकर भष्म लगाकर अपने शरीर को ठंडा कर चुके थे।

उन्होंने बताया कि भगवान की सोच थी कि एक दिन हर किसी व्यक्ति को इसी भष्म में समाहित हो जाना है, तो क्यों ने उसे पहले ही धारण कर लिया जाए। यह भगवान का अलौकीक श्रृंगार था। ऐसा विवाह कभी धरती पर न हुआ है और न ही होगा।

भगवान शंकर के पास जिस प्रकार तीन नेत्र थे ठीक उसी प्रकार मनुष्य को भी तीन नेत्र होते हैं। मनुष्य से जब कोई काम बिगड़ जाता है तो वह माथे पर पीट कर कहता है अरे बाप क्या हो गया। यही माथा तीसरा नेत्र है। जो विवेक की बात कहता है।

विवेक बगैर संत के नहीं मिलते, इसलिए संत के मार्ग दर्शन में चलने पर इसकी प्राप्ति होती है। इस दौरान एसडीएम सुरेंद्रनाथ मिश्र, प्रधान संघ अध्यक्ष वीरेंद्र तिवारी, बबिता कसौधन, विजय परसरामका, अशोक बोरा,  राजेंद्र बोरा, संतोष पोद्दार, श्रवण पोद्दार, प्रधानाचार्य डॉ. नलिनीकांत मणि त्रिपाठी, सुधा त्रिपाठी, राधारमण त्रिपाठी, नंदू प्रसाद गौड़,  दुर्गा प्रसाद तिवारी, टिंकू वर्मा, लालजी त्रिपाठी, रोहित वर्मा, द्रु्गेश अग्रहरि, रूद्र नाथ तिवारी, अभिषेक अग्रवाल, संतोष पोद्दार, राममिलन त्रिपाठी, जय प्रकाश वर्मा, पंकज श्रीवास्तव, महावीर वर्मा, एसपी अग्रवाल, पुरुषोत्तम शर्मा, कुसुम अग्रवाल, शकुंतला मिश्रा, सुमन शर्मा, श्रुति शर्मा, कीर्ति शर्मा, सुरभि मित्तल, रेनू मित्तल, शिवांगी कसौधन, पूनम परसरामका आदि मौजूद रहे।
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