सिद्धार्र्थनगर। बच्चे पढ़ें और आगे बढ़ें इसलिए अभिभावक उनकी हर मांग पूरी करते हैं। अभिभावकों की बड़ी लापरवाही है यह कि यह जानते हुए कि बच्चा नाबालिग है, इसके बाद भी विद्यालय जाने केे लिए बाइक और स्कूटी थमा दे रहे हैं। इससे हादसे की आशंका रहती है। विद्यालय प्रबंधन की दलील है कि परिसर में बाइक लाने पर रोक है लेकिन, बच्चे स्कूल के दाएं बाएं या अन्य ठिकानों पर बाइक खड़ी कर रहे हैं। जबकि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का विद्यालय में बाइक और स्कूटी लेकर आना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। बृहस्पतिवार को नगर के विद्यालयों की पड़ताल में छुट्टी होने के बाद बाइक से स्कूली बच्चे घूमते नजर आए।
तमाम जागरूकता कार्यक्रम के बाद भी सड़क हादसे बढ़ रहे हैं। इन हादसों में सबसे अधिक मौतें 14 से 40 वर्ष की आयु के लोगों की हो रही है। हादसे में 14 से 18 वर्ष की आयु के बीच जान गंवाने वाला किसी न किसी विद्यालय का छात्र रहता है। जबकि पहले से नियम है कि 18 से कम उम्र है तो विद्यार्थी विद्यालय में बाइक लेकर नहीं जाएगा।
एआरटीओ की ओर से आठ दिन पूर्व जिलाविद्यालय निरीक्षक के माध्यम से सभी विद्यालयों को पत्राचार कराया गया कि 12-18 की आयु सीमा वाले विद्यार्थी अगर स्कूटी और बाइक से विद्यालय आते हैं तो उन्हें प्रवेश न दिया जाए। इस आदेश के अनुपालन की हकीकत जाने के लिए नगर के विद्यालयों की पड़ताल की गई तो पता चला कि सब हवा हवाई है।
दोपहर 1.50 बजे केंद्रीय विद्यालय के बाहर बच्चे बाइक से जाते नजर आए। बिना हेलमेट बाइक से फर्राटा भरते हुए शहर में प्रवेश कर गए। हालांकि विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि बाइक का प्रवेश वर्जित है। ऐसे में वह बाइक कहां खड़ी करते हैं, यह सवाल है। वहीं, दोपहर 3:05 बजे नगर के रघुवर प्रसाद जायसवाल विद्यामंदिर इंटर कॉलेज की छुट्टी हुई थी। यहां पेट्रोल पंप के पास ड्रेस में कई बच्चे बाइक से निकलते दिखे। कुछ के लेगगार्ड में हेलमेट टंगा दिखा। जबकि कुछ छात्र बिना हेलमेट के दो या तीन सवारी निकलते दिखे। इसी समय जयकिसान इंटर कॉलेज सनई में भी यही हाल था।
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बोले जिम्मेदार
विद्यालय में बाइक और स्कूटी पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। किसी भी बच्चे को बाइक और स्कूटी लेकर परिसर में आने की अनुमति नहीं है। इसमें अभिभावक को जागरूक होने की जरूरत है कि वह बच्चों को बाइक न दें। -राकेश मणि त्रिपाठी, प्रधानाचार्य रघुवर प्रसाद जायसवाल सरस्वती विद्यामंदिर इंटर कॉलेज तेतरी बाजार
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विद्यालय खुलते ही चेकिंग की जाएगी। अगर कोई बच्चा स्कूटी या फिर बाइक लेकर आता मिलेगा तो उसे जागरूक करके लौटा दिया जाएगा। बाइक लेकर कभी विद्यालय में नहीं आने के लिए निर्देश दिए जाएंगे। विद्यालय में बच्चों को बाइक के साथ प्रवेश पूर्ण रूप से रोका जाएगा। -जयराम यादव, प्रधानाचार्य जय किसान इंटर कॉलेज सकतपुर सनई
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बोले अभिभावक
बाइक लेकर बच्चों का स्कूल जाना ठीक नहीं है। अभिभावक को हमेशा डर लगा रहता है। लेकिन जिद के आगे लोग हार जाते हैं। बच्चे अच्छी तरह से पढ़ें, इसलिए न चाहते हुए लोग वाहन दे रहे हैं। इस पर रोक लगनी चाहिए। -पीतांबर मौर्य, अभिभावक
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आज बच्चे हर बात पर जिद कर ले रहे हैं। अगर सुविधा नहीं मिली तो विद्यालय जाना छोड़ देते हैं। उनके आगे मजबूर होकर लोग गाड़ी दे रहे हैं। लेकिन यह गलती कभी-कभी भारी पड़ सकती है। अभिभावकों को जागरूक होने की जरूरत है। -निरंजन चौरसिया, अभिभावक
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बोले जिम्मेदार
विद्यालयों में जागरूकता अभियान चलाया जाता है। बच्चों को बताया जाता है कि बाइक और स्कूटी न चलाएं। चेकिंग के दौरान स्कूल ड्रेस में मिलने केे बाद भी उन्हें समझाया जाता है। कभी-कभी कार्रवाई भी की जाती है। -अमरेश यादव, यातायात प्रभारी
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बोले अधिकारी
सड़क हादसों काे रोकने के लिए विद्यालयों में बच्चों को जागरूक किया जा रहा है। सभी विद्यालय संचालकों को पत्र जारी करके निर्देश दिए गए हैं कि बाइक और स्कूटी लेकर विद्यालय आने वाले बच्चों को रोका जाए। उन्हें समझाया जाए, जिससे हादसों में कमी लाई जा सके। -उपेंद्र कुमार, जिलाविद्यालय निरीक्षक
शहर के सिद्धार्थ तिराहे पर बाइक पर बिना हेलमेट के जाते तीन छात्र। संवाद