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Siddharthnagar News: पशुओं पर भी तनाव का असर, कर रहे आक्रमण

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शहर के उसका मार्ग पर घूम रहे छुट्टा पशु। संवाद
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-मौसम का असर गर्मी में चढ़ जा रहा पशुओं का पारा, कर दे रहे लोगों पर हमले
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-छुट्टा पशु और कुत्तों में बढ़ रहा आक्रोश, काटने के लिए टूट पड़ते हैं

-चार दिन पहले सांड़ के हमले में दो युवक के हो गए घायल, खेसरहा में एक सांड ने 22 लोगों पर किया हमला
- चार दिन पहले बेहोशी का इंजेक्शन देकर पकड़ा गया हमलावर सांड़

संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अगर आप यह समझ रहे हैं कि इंसान ही तनाव में आता है, तो गलत है। पशु भी तनाव में आते हैं। चाहे वह कुत्ते हों या सांड़ और छुट्टा पशु। यह तनाव में आते हैं, पशु मारता है, जबकि कुत्ता, बिल्ली और सियार जानलेवा हमला करते हैं। इंसान परिस्थितियों के प्रतिकूल होने या गहरा आघात लगने पर तनाव में जाता है और घातक कदम उठाता है।खुद के साथ ही सामने वाले को नुकसान पहुंचा देता है।
कुछ ऐसा ही इन दिनों छुट्टा पशु सांड़, बैल आदि और कुत्तों में देखने को मिल रहा है, वह हमलावर हो रहे हैं। जैसा कि चार दिन पहले चौखड़ा में सांड़ के हमले में एक युवक जख्मी हो गया। इटवा कस्बे में एक सांड़ ने हमला करके कई लोगों को घायल कर दिया। इसके अलावा अन्य घटनाएं भी हैं। इसके पीछे पशु विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक प्रकार से मौसम का असर है। इसका कारण कारण पशुओं को पानी न मिलना, हर जगह डंडा पड़ना, कड़ी धूप का होना प्रमुख वजह है। इससे वे तनाव में आ जा रहे हैं।
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गर्मी बढ़ने के साथ इनका व्यवहार बदलेगा। कुत्ते और हमलावर होंगे। ऐसे में इनसे बचाव की जरूरत है। बच्चों और बुजुर्गों को बचाने के साथ-साथ पानी और बचा हुआ भोजन कुत्ताें को देने से उनके व्यवहार को बदला जा सकता है।
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जिले में इतनी है घुमंतू कुत्तों की तादाद, चार लोगों को गर्मी में ही काटकर मार डाला
पशु चिकित्सा विभाग के सर्वे के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में पिछली पशु गणना में 19 हजार घुमंतू कुत्ते पाए गए थे। इनमें नगर पालिका और ग्रामीण क्षेत्र दोनों हैं। नगर क्षेत्र में संख्या कुछ अधिक है। एक कुत्ते की उम्र पांच से सात वर्ष के करीब मानी जाती है। ऐसे में हर साल प्रजजन होता तो संख्या बढ़कर 25 हजार के करीब पहुंच गई होगी। कारण जनपद में घुमंतू कुत्तों की नसबंदी की कोई व्यवस्था नहीं है। बीते वर्ष की बात करें तो अप्रैल से जून के बीच में कुत्तों के हमले में दो तीन बच्चों समेत चार की जान चली गई थी। इसके पीछे गर्मी और भूख के कारण तनाव में आना है और जिसे पाया नोच डाला।
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एक सांड़ ने 20 से अधिक लोगों पर एक दिन में किया हमला
बीते माह बांसी तहसील क्षेत्र के कासडीह गांव में एक सांड़ प्रतिदिन लोगों काे मारता था। अचानक एक ही दिन में 20 से अधिक लोगों को मार दिया। इसमें कई लोगों को अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आ गई। जो सामने पड़ता उसे मार देता। प्रशासन ने पकड़ने की बहुत कोशिश की, लेकिन एक पकड़ा गया, जबकि जो हमलावर थे, कब्जे में नहीं आया। इसी प्रकार तीन दिन पूर्व इटवा क्षेत्र के चौखड़ा में एक सांड़ एक बाइक सवार पर टूट पड़ा। गिरने के बाद भी उसे मारता रहा। युवक का गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। वहीं, इटवा कस्बे में एक सांड़ लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। आए दिन राहगीरों पर हमला कर रहा है। यह गोशाला से भागकर चला आया। दो दिन पहले सदर थाना क्षेत्र के युसुफपुर गांव एक सांड़ को बेहोश करने वाला इंजेक्शन देकर पकड़ा गया। वह गांव के 50 लोगों को मार चुका था।जबकि, पूर्व में त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र में सांड़ के हमले में दो किसानों की जान भी जा चुकी है।
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बोले विशेषज्ञ- इसलिए बदल रहा व्यवहार
गर्मी में इम्यूनिटी पाॅवर कम होने और पानी की कमी होने के कारण इंसान गुस्से में आ जा रहा है। इसी प्रकार पशुओं का भी हाल है। पालतू पशु को लोग छांव में रख रहे हैं। उन्हें हरा चारा के साथ दाना, भूसा और पानी दिया जाता है, जबकि, छुट्टा पशु जहां पहुंचते हैं, उन्हें पानी, चारा देने के बजाय लोग डंडा मारकर भगाते हैं। अगर छांव में बैठने की कोशिश करते हैं तो भगाया जाता है। इस वजह से भूख, गर्मी से चिड़िचिड़ा हो जाते हैं, फिर सामने वाले पर टूट पड़ते हैं। यही कुत्तों के साथ है, गर्मी में उनकी मानसिक स्थिति पहले से सही नहीं रहती है। ऐसे में भूख और पानी न मिलने से बेचैन हो जाते हैं। इसलिए कहीं खाने के लिए तो कहीं अन्य कारण से काटने के लिए दौड़ पड़ते हैं। गर्मी में इनसे दूर रहने की जरूरत है। खास करके बच्चों और बुजुर्गाें को।
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-अरुण कुमार प्रजापति, पशुधन प्रसार अधिकारी
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पशुओं को रखने के लिए गोशाला बनी है। अगर कोई पशु मारता है तो ब्लॉक और नगर पंचायत क्षेत्र का है तो वहां बताकर गोशाला में भेजवा दें। गर्मी में पानी चारा न मिलने से व्यवहार बदल जाता है। साथ ही अगर कोई पशु घर के सामने बैठता है तो उसे भगाए नहीं। घर के सामने पानी जरूर रख दें, जिससे पशु को दिक्कत न हो। वहीं, कुत्ते को बचा हुआ खाना दे सकते हैं। पानी किसी बर्तन में रख सकते हैं, जिससे वह पी सकें। अगर घर में सामने कोई अनजान कुत्ता दिखें तो बचें। अगर पानी और बचा हुआ भोजन मिल जाए तो तनाव कम हो सकता है। अगर कुत्ता काटता है तो तत्काल एंटी रैबीज का इंजेक्शन जरूर लगवाएं।
-डॉ. गणेश सीवीओ
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