सिद्धार्थनगर। अप्रैल की तेज होती गर्मी का असर अब खेल मैदानों पर साफ दिखने लगा है। दोपहर में जहां मैदान सूने नजर आते हैं, वहीं सुबह 6 से 9 बजे और शाम 5:30 बजे के बाद बच्चों और युवाओं की भीड़ बढ़ जाती है। क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन और वॉलीबाल जैसे खेल अब पूरी तरह टाइम शिफ्ट पर आ गए हैं।
जिला स्टेडियम, स्कूल मैदानों और गांवों के खेल ग्राउंड पर दोपहर में सन्नाटा पसरा रहता है। खिलाड़ियों का कहना है कि धूप में खेलना अब जोखिम भरा हो गया है। तापमान 40 डिग्री के आसपास पहुंचने से शरीर जल्दी थक जाता है और चक्कर आने जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं।
कोच और खेल शिक्षकों ने भी खिलाड़ियों को दोपहर में अभ्यास से बचने की सलाह दी है। कई स्कूलों ने स्पोर्ट्स पीरियड को सुबह की शिफ्ट में शिफ्ट कर दिया है।
वहीं, निजी एकेडमियों में भी अभ्यास का समय बदला गया है। ग्राउंड पर मौजूद खिलाड़ी बताते हैं कि शाम के समय भी गर्म हवाएं चलती हैं, लेकिन सूरज ढलने के बाद स्थिति थोड़ी बेहतर हो जाती है। हालांकि, पानी की कमी और छांव की व्यवस्था न होने से परेशानी बनी रहती है। डॉ. सीबी चौधरी के अनुसार इस मौसम में लगातार खेलना शरीर पर भारी पड़ सकता है। डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या बढ़ जाती है। इसलिए खिलाड़ियों को हल्के कपड़े पहनने, ज्यादा पानी पीने और बीच-बीच में आराम करने की सलाह दी जा रही है।
गांवों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण है। वहां न तो शेड की सुविधा है और न ही पीने के पानी का इंतजाम। ऐसे में बच्चे अक्सर खेल को टाल देते हैं या बहुत कम समय के लिए मैदान में उतरते हैं। इसके बावजूद खेल के प्रति उत्साह कम नहीं हुआ है।
प्रतियोगी परीक्षाओं और सेना भर्ती की तैयारी कर रहे युवा सुबह जल्दी उठकर दौड़ और अभ्यास कर रहे हैं। उनके लिए मौसम की मार के बावजूद मैदान छोड़ना विकल्प नहीं है।