सिद्धार्थनगर। जिले में ई-रिक्शा की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। अधिकांश ई-रिक्शा की स्टेयरिंग अप्रशिक्षित और किशोरों के हाथ में है। चलते-चलते कब मुड़ जाएं और किसको टक्कर मार दें कोई पता नहीं है। इनकी लापरवाही से आए दिन हादसे हो रहे हैं। इसके बाद भी इनकी मनमानी पर रोक लगाने के लिए जिम्मेदार आगे नहीं आ रहे हैं।
साइकिल रिक्शा के बाद ई-रिक्शा का चलन बढ़ा तो रिक्शा चलाने वाले बिना प्रशिक्षण के ई-रिक्शा की स्टेयरिंग पकड़ लिए हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में लगभग तीन हजार ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। इसमें तकरीबन एक हजार ई-रिक्शा शहर के मुख्य मार्ग और गलियों में घूम रहे हैं। पलक झपका नहीं कि तबतक दूसरा सामने पहुंच जाता है। इसमें अप्रशिक्षित होने के साथ ही बड़ी संख्या में किशोर ई-रिक्शा चलाते हुए देखे जा रहे हैं। तीन हजार में दो हजार लोगों के पास ही डीएल (ड्राइविंग लाइसेंस) है। जिनके पास दोपहिया वाहन के लाइसेंस हैं, वे भी खुलेआम बिना डर भय के इसे दौड़ा रहे हैं। कार्रवाई करने वाले जिम्मेदार बेखबर हैं।
नहीं बना लाइसेंस चला रहे ई-रिक्शा
जोगिया क्षेत्र के उमेश कुछ समय पहले साइकिल से सब्जी बेचते थे। उसे बाइक भी चलाने नहीं आती है। लेकिन वह सब्जी बेचना छोड़कर शहर में ई-रिक्शा चला रहा है। उसने बताया कि अभी लाइसेंस नहीं बना है। लाइसेंस बनवाने के प्रयास में है। तबतक चला रहा है। वहीं, कक्षा में 11वीं में पढ़ने वाला रोहित सुबह और शाम को ई- रिक्शा चलाता है। विद्यालय से आने के बाद शाम से रात 11 बजे तक शहर में चलाते हैंं। सुबह स्कूल जाने से पहले कोई बुकिंग मिली तो उसे छोड़ देते हैं। नाबालिग होने के कारण उसका लाइसेंस नहीं बना है। ऐसे न जाने के कितने लोग हैं।
किराये पर मिलता है ई- रिक्शा
जो लोग किराये पर रिक्शा चलवाते थे। जबसे ई-रिक्शा चलन में आया है। ई-रिक्शा किराये पर चलवा रहे हैं। जो कल तक रिक्शा चलाता था, अब वही व्यक्ति ई-रिक्शा चलाने लगा है। इसलिए एकाएक ई-रिक्शा के संख्या में वृद्धि हुई है। जो चाहे 300 रुपये प्रतिदिन दे और ई-रिक्शा लेकर जाए। किराये पर ई-रिक्शा देने वाले लाइसेंस के बारे में पूछते तक नहीं हैं।
नहीं हो सका रूट का निर्धारण
शहर में एक हजार से अधिक ई-रिक्शा चलता है। लेकिन इनका न तो रूट तय है और न ही स्टैंड बना हुआ है। जो जहां पाया खड़ा होकर सवारी भरने लगा। दो साल से स्थाई स्टैंड बनाने के बात चल रही है। लेकिन अभी तक में स्थाई स्टैंड चिह्नित नहीं हो सका है।
सर्वाधिक हादसे वाली जगह
अगर शहर में किसी काम से बाइक और पैदल निकलते हैं तो संभल जाएं। क्योंकि शहर में कुछ ऐसे स्थान हैं, जहां ई-रिक्शा वाले कभी भी टक्कर मार सकते हैं। मुख्य मार्ग से लेकर गलियों तक इनकी दौड़ रहती है। इसमें खुजरिया मार्ग मोड, तहसील मोड, हाईडिल तिराहा, विद्यामंदिर गली, स्टेशन रोड यहां अचानक सामने आने से अकसर हादसे हो जाते हैं। इसके साथ ही शहर के डिवाइडर के बीच हुए कट वाले स्थान, जैसे मंडी मोड, नौगढ़ ब्लॉक के सामने, पीएचसी के सामने, पीडब्ल्यूडी के सामने और गोबरहवा मोड संवेदनशील है। इन स्थानों पर यह कब मुड़ जाएं और टक्कर मार दें समझ नहीं पाएंगे।
बाइक सवार का टूट गया पैर
खजुरिया मोड थाना रोड़ पर एकाएक रिक्शा के मुड जाने से लोटन क्षेत्र के बाइक सवार उमेश की बाइक में टक्कर लग गई। उन्हें लोगों ने जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां एक्स-रे में पैर एक हड्डी टूट पाई गई। उसे प्लास्टर चढ़वाना पड़ा था। जबकि ई-रिक्शा वाला भाग निकला था।
दो लोगों को मारी टक्कर
दो दिन पहले एक ब्लॉक स्तरीय अधिकारी किसी के साथ निकले थे। अभी वह ब्लॉक के पास पहुंचे थे कि एक ई-रिक्शा वाला अचानक मुड़ा और दोनों को टक्कर मार दिया। हादसे में दोनों को लोगों को चोट आई। रात में ही उसे पकड़कर थाने पर लेकर गए, जहां रोने लगा।
ट्रैफिक पुलिस के साथ चेकिंग अभियान चलाकर लगातार जांच की जा रही है। अगर कोई नाबालिग ई-रिक्शा चलाते हुए मिला तो अभिभावक के खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा।
-सुरेश कुमार, एआरटीओ
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नगर में वाहनों की रूट को नगर पालिका के साथ मिलकर तय किया जाएगा। इसके साथ ही वाहनों का स्टैंड बनाया जाएगा।
-डॉ. ललित कुमार मिश्र, एसडीएम सदर