बढ़नी के अकरहरा में तालाब के उपर बना रिहाइशी मकान।
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सिद्धार्थनगर। वर्ष 2008 की बात है, जिले में मत्स्य विभाग के विशेष सचिव ढेबरुआ के अकरहरा में पहुंचे थे। बढ़नी ब्लॉक के अकरहरा में एक ऐसा परिवार है जो मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए खास था। शासन ने इस पालक को राज्य स्तर का पुरस्कार दिया था बावजूद इसके जिले में मत्स्य पालन की संभावना को धार नहीं मिली। विभाग की उदासीनता ने इस बड़ी उपलब्धि पर पानी फेर दिया और मत्स्य पालन के क्षेत्र मे बेहतर मिसाल न कायम कर सका।
अकरहरा गांव के किसान खोवैब खान ने वर्ष 2005 में निजी प्रयासों से तीन एकड़ परिक्षेत्र में न सिर्फ तालाब निर्मित कराया बल्कि तालाब पर पिलर के सहारे मकान भी तैयार किया। मत्स्य पालन के लिए तालाब और उपर रहने के लिए यह खुद में नया प्रयोग था पर इसे बखूबी अंजाम दिया गया।
बीस लाख रुपये की लागत से तैयार इस निर्माण से खोवैब खान प्रति वर्ष लगभग दस लाख रुपये से अधिक की आय करते हैं। तालाब के उपर मकान होने से न सिर्फ परिवार को रहने के लिए छत मिली वरन मछलियों की रखवाली का एक बेहतर जरिया भी मिला। खोवैब के इस निर्माण की तरकीब जर्मनी में चिकित्सक रहे उनके बड़े भाई शकेब खान का रहा। वर्ष 2008 में इस निर्माण के लिए खोवैब खान का राज्य स्तर का पुरस्कार दिया गया। यह निर्माण अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकता था जो नकदी फसल की खेती से जुड़े हैं
। विभागीय उदासीनता के कारण ऐसी कोशिशों पर परवान न चढ़ सका। किसानों को अपनी जमीन पर तालाब खुदवाने और मत्स्य पालन के लिए अनुदान की योजना जरूर चल रही है पर किसानों को इसके लाभ समझाना और प्रेरित करने में विभाग फिसड्डी रहा जिसके चलते ऐसे प्रयासों को बढ़ावा नहीं मिल सका।