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स्टांप और नोटरी टिकट शुल्क 25 रुपये, देने पड़ रहे सौ

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स्टांप और नोटरी शुल्क 25 रुपये, देने पड़ रहे 100
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किसानों और आम लोगों को स्टांप शुल्क से कहीं अधिक धन चुकाना पड़ रहा
शपथ पत्र सहित अन्य कार्यों के लिए आने जरूरतमंदों का किया जा रहा शोषण
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। तहसील, संभागीय परिवहन कार्यालय पर शपथपत्र बनवाने वालों को स्टांप और नोटरी के निर्धारित शुल्क से तीन से चार गुना अधिक धनराशि चुकानी पड़ रही है। स्टांप और नोटरी फीस के निर्धारित शुल्क से कई गुना अधिक चुकाए बगैर शपथपत्र नहीं मिलता। स्टांप खरीद के नाम पर वसूली गई यह अतिरिक्त धनराशि किसको मिलती है यह कोई भी बताने को तैयार नहीं। सरकार आम जनता की सहूलियत के लिए व्यवस्थाओं को पारदर्शी बना रही है, जिससे लोगों को लाभ मिले। राजस्व से जुड़े जानकारों के मुताबिक सामान्य कार्यों में प्रयोग होने वाले स्टांप और नोटरी टिकट का शुल्क 25 रुपये निर्धारित है। बावजूद इसके तहसील और एआरटीओ कार्यालय में नोटरी बनवाने के लिए पहुंचे जरूरतमंदों को इसके लिए 100 रुपये देने पड़ रहे है। खुले तौर पर आम लोगों से धनादोहन किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार बेखबर हैं। उन्हें न तो शासन के निर्देशों की परवाह है और न ही आम जनता की तकलीफों से मतलब।
नोटरी के लिए लगा 100 रुपये
एआरटीओ कार्यालय में लाइसेंस बनवाने के लिए पहुंचे बांसी कस्बा निवासी अभिषेक ने बताया कि लाइसेंस बनवाना था। यहां पहुंचा तो पता चला कि एक शपथ पत्र लगेगा। शपथ पत्र बनवाने के लिए खर्चा 100 रुपये बताया गया। इसमें 10 रुपये का स्टांप और नोटरी टिकट लगा, लेकिन कुल 100 रुपये लिए गए।
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कमरा किराए पर लेने के लिए देना था शपथ पत्र
सदर तहसील में पहुंचे कपिलवस्तु क्षेत्र के निवासी महेश ने बताया कि उन्हें किराये पर कमरा लेना था। इसलिए स्टांप पर नोटरी कराना था। अधिवक्ता ने बताया था कि अधिकतम 50 रुपये लगेगा। मगर यहां आए तो 90 रुपये लगा। इसका निर्धारित शुल्क होना चाहिए।
हर जगह हो रहा है शोषण
लोटन कोतवाली क्षेत्र के निवासी किसान विजयपाल तहसील में आए थे। उन्हें जमीन से जुड़े एक कागजात में शपथ पत्र लगाना था। उन्होंने बताया कि 10 रुपये के स्टांप पेपर पर शपथ पत्र बनाया। लेकिन 120 रुपये लिए गए। किससे कितना ले लिया जाए। इसका कोई पता नहीं है।
हर शुल्क का नियम लागू हो
ठेके के लाइसेंस बनवाने के लिए तहसील पहुंचे खेसरहा क्षेत्र के दीपक ने बताया कि ठेकेदारी के लिए उन्हें लाइसेंस बनवाना था। इसके लिए शपथ पत्र लगता है। स्टांप, टाइप और टिकट के लिए 100 रुपये देना पड़ा। जबकि स्टांप 10 रुपये का ही लगा। किस पर कितना शुल्क लगेगा। यह सीमा निर्धारित होनी चाहिए।
निर्धारित शुल्क लिया जाता है
दस रुपये के स्टांप पर पंद्रह रुपये नोटरी टिकट लगाकर वेंडर उपभोक्ता से मात्र 25 रुपये ही लेता है। कोई अधिक शुल्क नहीं लिया जाता, नियम के तहत ही काम किया जाता है। एक शपथपत्र पर अब वकील कितनी रकम लेते हैं यह वकील और उसके मुवक्किल के बीच का मामला है।
- संतोष कुमार मिश्र, जिलाध्यक्ष स्टांप वेंडर संघ
पहले से निर्धारित राशि मिलती है
राजस्व विभाग से जुड़े एक जानकार ने बताया कि ट्रेजरी से स्टांप खरीदते समय ही वेंडर की राशि उसी में निर्धारित कर दी जाती है। इसके बाद अगर वह अधिक राशि ले रहा है तो यह गलत है। क्योंकि स्टांप देते समय एक प्रतिशत कम शुल्क पर दिया जाता है।
दस रुपये के स्टांप पर दस रुपये की नोटरी लगती है। इसमें वकील कोई धन नहीं लेते। यदि निर्धारित राशि से ज्यादा शुल्क वसूला जा रहा है तो यह अनैतिक है। वकील इसमें किसी तरह का धन नहीं वसूलते हैं।
राधेश्याम मिश्र, निवर्तमान अध्यक्ष सिद्धार्थ सिविल बार एसो.
स्टांप और नोटरी में निर्धारित शुल्क से ज्यादा वसूले जाने की शिकायत आज तक नहीं मिली। बावजूद इसके मैं अपने स्तर से इसकी जांच कराऊंगा। निर्धारित शुल्क से अधिक वसूलते पाए जाने वाले स्टांप-नोटरी वेंडरों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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- दीपक मीणा, जिलाधिकारी
निर्धारित शुल्क से ज्यादा स्टांप शुल्क वसूला जाना गलत है। इससे आम जनता को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। प्रशासन का यह दायित्व है कि निर्धारित धनराशि ही वसूल की जाए। इस संबंध में डीएम और संबंधित अधिकारियों से बात की जाएगी।
- जगदंबिका पाल, सांसद, डुमरियागंज
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