एसएसबी की पहली महिला डीजी अर्चना रामासुंदरम ने सीमावर्ती क्षेत्र में समग्र प्रबंधन के रूप में काम करने पर जोर दिया है। डीजी बनने के बाद पहले कार्यक्रम में शामिल होने आई अर्चना रामासुंदरम ने कहा कि एसएसबी लोगों के बीच जा रही है।
सुरक्षा के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्वच्छता, महिला सशक्तीकरण जैसे सामाजिक सरोकारों पर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए एसएसबी सीमावर्ती क्षेत्र के गांवों में शिविर भी लगा रही है।
पकड़िहवा में आयोजित कार्यक्रम में पहुंची डीजी ने कहा कि वर्ष 08 से एसएसबी में महिलाओं की भर्ती शुरू हुई थी, जिनकी संख्या अब हजारों में पहुंच चुकी है। चार बड़े पदों पर महिलाएं काम कर रही हैं।
कहा कि बगैर सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों का सहयोग मिले, सुरक्षा कार्य संभव नहीं है। लिहाजा एसएसबी अब लोगों के बीच जा रही है। एक रक्षक की बजाए उनका सहयोगी बनकर काम करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने वर्ष 2018 तक बड़ी संख्या में भर्ती किए जाने की बात कही। कार्यक्रम में सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि उत्तराखंड के टनकपुर से बिहार के रक्सौल तक 1470 किमी की भारत-नेपाल सीमा पर सड़क बनाने की योजना के मूर्त रुप लेने से दोनों देशों के बीच दोस्ती का नया अध्याय शुरू होगा।
इससे सीमा सुरक्षा में लगे जवानों को भी सहूलियत मिलेगी। उन्होंने एसएसबी जवानों को फ्री सिम देने की मांग की, ताकि वह घर-परिवार के संपर्क में बने रहें। बटालियन हेडक्वार्टर के जिले में निर्माण की भी मांग उठाई।
सांसद पंकज चौधरी ने भी सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों का सहयोग लेकर सुरक्षा पुख्ता करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में डीआईजी डा.प्रफुल्ल कुमार रोशन ने अतिथियों का आभार जताया।
इस मौके पर जिलाध्यक्ष रामकुमार कुंवर, पूर्व जिलाध्यक्ष नरेन्द्र मणि, कन्हैया पासवान, राधेरमण, साधना चौधरी, राज्य महिला आयोग की सदस्य जुबैदा चौधरी, चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव, बबलू श्रीवास्तव, हेमंत जायसवाल, भूनेश्वर, दिलीप चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे।