संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज बनने के चार वर्ष बाद भी स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो पाई है। इससे आए दिन मरीजों को गोरखपुर, लखनऊ व निजी अस्पतालों में गंभीर मरीज को इलाज करवाने के लिए जाना पड़ता है। ऐसे में कई बार मरीज को अपने जान पर भी बन आती है।
मेडिकल कॉलेज बनने के बाद जिले के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं और भी बेहतर होने की उम्मीद थी, लेकिन साल दर साल बीतता जा रहा है। कई नई भवन भी खड़ी हो रही है।
भवन बनने के बाद भी डॉक्टरों की तैनाती न होने से मरीजों को स्वास्थ्य को लेकर हलकान होना पड़ रहा है। जिले के लोगों को कहना है कि मेडिकल कॉलेज बनने के बाद सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इससे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलाॅजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट, गैस्ट्रो व कार्डियोलॉजिस्ट के डॉक्टर की तैनाती नहीं हो पाई है। इससे मरीजों को हलकान होना पड़ता है। जबकि मेडिकल कॉलेज के नए व पुराने भवन में लगभग 600 बेड की सुविधा है, लेकिन अभी तक आईसीयू के लिए एक भी वार्ड नहीं बनाया गया है। जो मरीजों को और भी दर्द दे रहा है।
आईसीयू व स्पेशलिस्ट की सुविधा न होने से मरीज प्राइवेट व बड़े शहरों का चक्कर लगा रहे हैं। लोगों का कहना है कि ऐसी सुविधा होने से क्या फायदा, जब अन्य शहर का चक्कर काटना पड़ रहा है। व