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Siddharthnagar News: मेडिकल कॉलेज में दूरबीन विधि से सर्जरी जल्द

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संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में जल्द ही दूरबीन विधि से सर्जरी की जाएगी। इसके लिए उपकरण की खरीदारी के लिए पत्र भी भेजा गया है। इस कवायद को पूरा होने से मरीजों को हिस्टेरोस्कोपी, सिस्टोस्कोपी व लेप्रोस्कोपिक की सुविधा मिलेगी, जिससे बिना टांका, चीरा लगाए ही मरीजों के गंभीर रोगों का ऑपरेशन किया जा सकेगा।
हिस्टेरोस्कोपी, सिस्टोस्कोपी व लेप्रोस्कोपिक विधि से मरीजों का कम समय में ही ऑपरेशन कर दिया जाता है। जबकि इसमें मरीजों को काफी दिनों तक बेड रेस्ट नहीं रहना पड़ता है। ऐसे में इस विधि से ऑपरेशन करने पर मरीजों को बेहतर सुविधा मिलती है।
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चिकित्सकों के अनुसार हिस्टेरोस्कोपी, सिस्टोस्कोपी और लेप्रोस्कोपी तीन अलग-अलग सर्जिकल प्रक्रियाओं हैं, जिनका उपयोग विभिन्न अंगों की जांच और उपचार के लिए किया जाता है।
स्त्री एवं प्रसूती रोग विभाग की एचओडी डॉ. प्रतिभा यादव व सर्जन डॉ. आशीष त्रिपाठी ने बताया कि हिस्टेरोस्कोपी में, हिस्टेरोस्कोप नामक एक उपकरण को गर्भाशय ग्रीवा के माध्यम से गर्भाशय में डाला जाता है, जबकि सिस्टोस्कोपी में, सिस्टोस्कोप को मूत्रमार्ग के माध्यम से मूत्राशय में डाला जाता है। लेप्रोस्कोपी में, लेप्रोस्कोप को पेट में एक छोटा चीरा लगाकर डाला जाता है।
डॉ. प्रतिभा ने बताया कि हिस्टेरोस्कोपी से गर्भाशय के अंदर की जांच करने के लिए किया जाता है। इसमें, एक पतला, रोशनी वाला, लचीला ट्यूब (हिस्टेरोस्कोप) को गर्भाशय ग्रीवा के माध्यम से गर्भाशय में डाला जाता है। हिस्टेरोस्कोप में एक कैमरा और प्रकाश होता है, जो गर्भाशय के अंदर की तस्वीरें दिखाता है। हिस्टेरोस्कोपी का उपयोग गर्भाशय के अस्तर की जांच करने, पॉलिप या फाइब्रॉएड जैसे असामान्यताओं को देखने, या गर्भाशय के अंदर छोटे उपचार करने के लिए किया जाता है।
सर्जरी विभाग के चिकित्सक डॉ. आशीष त्रिपाठी ने बताया कि सिस्टोस्कोपी के उपयोग से मूत्राशय और मूत्रमार्ग की जांच करने के लिए किया जाता है। इसमें, एक पतला, रोशनी वाला, लचीला ट्यूब (सिस्टोस्कोप) को मूत्रमार्ग के माध्यम से मूत्राशय में डाला जाता है।
सिस्टोस्कोप में एक कैमरा और प्रकाश होता है, जो मूत्राशय और मूत्रमार्ग के अंदर की तस्वीरें दिखाता है। सिस्टोस्कोपी का उपयोग मूत्राशय में पथरी, संक्रमण, या ट्यूमर का निदान करने या छोटे उपचार करने के लिए किया जाता है। वहीं लेप्रोस्कोपी से पेट के अंदर की जांच करने और उपचार करने के लिए की जाती है।
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इसमें, एक पतला, रोशनी वाला, लचीला ट्यूब (लेप्रोस्कोप) को पेट में एक छोटा चीरा लगाकर डाला जाता है। लेप्रोस्कोप में एक कैमरा और प्रकाश होता है, जो पेट के अंदर की तस्वीरें दिखाता है। लेप्रोस्कोपी का उपयोग गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब, अंडाशय, या अन्य पेट के अंगों की जांच करने, या छोटे उपचार करने के लिए किया जाता है।
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