शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के शोहरतगढ़-खुनुंवा मार्ग पर स्थित रमवापुर तिवारी गांव के पास हुआ हादसा
- हादसे के बाद आक्रोशित हुए ग्रामीण, किया विरोध
-दोनों मोटरसाइकिल पर तीन-तीन बोरी थी यूरिया, रफ्तार तेज थी और घसीटते हुए 15 फीट चला गया छात्र
- संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के शोहरतगढ़-खुनुवां मार्ग पर स्थित रमवापुर तिवारी गांव के पास तेज रफ्तार बाइक सवार ने कक्षा आठवीं के छात्र को टक्कर मार दिया। हादसे में वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया। वहीं टक्कर मारने वाला एक बाइक सवार भी जख्मी हो गया। भाग रहे उसके दूसरे साथी को ग्रामीणों ने दौड़कर पकड़ लिया और पीट दिया। ग्रामीणों ने कहा कि दोनों तस्कर हैं और यूरिया लेकर नेपाल जा रहे थे। इसलिए तेज गति से जा रहे थे। यह गांव के लोगों के लिए हमेशा से खतरा बने हुए हैं। प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा है। अगर तस्करों पर शिकंजा कसा जाए तो घटनाएं न हों। घायल छात्र को शोहरतगढ़ सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है।
क्षेत्र के लुचुईया गांव के टोला बैदौला निवासी छात्र सुनील कुमार कन्नौजिया (14) पुत्र विजय कन्नौजिया शोहरतगढ़-खुनुवां मुख्य मार्ग से सटे लाल बहादुर शास्त्री उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में कक्षा आठवीं का छात्र है। रोज की तरह शनिवार को भी साइकिल से रमवापुर तिवारी स्थित विद्यालय में वह पढ़ने आया था। दोपहर एक बजे छुट्टी होने पर वह घर जाने के लिए साइकिल लेकर विद्यालय पसिर से होते हुए जैसे ही सड़क पर पहुंचा कि तभी शोहरतगढ़ कस्बे की ओर से एक बाइक पर दो नाबालिग तीन बोरी यूरिया खाद लादकर तेज गति से जा रहे थे, तभी उनकी बाइक की टक्कर छात्र की साइकिल से हो गई। छात्र साइकिल सहित लगभग 15 फीट तक घिसटते चला गया। हादसे में चोट लगने के कारण उसकी हालत गंभीर हो गई।
दोनों तस्कर निकले किशोर
घटना में कैरियर मोहम्मद हुसैन उर्फ छोटकन (17) पुत्र रसीद के सिर में चोट आई है। वहीं अरबाज (17) पुत्र रहीम को हल्की चोट आई है। दोनों शोहरतगढ़ क्षेत्र के सीमावर्तीं गांव गुजरौलिया के निवासी है। सूचना पर मौके पर पहुंची शोहरतगढ़ पुलिस ने घायलों को इलाज के लिए शोहरतगढ़ अस्पताल पहुंचाया। जहां हालत गंभीर देखकर छात्र को जिला अस्पाल रेफर कर दिया गया। एसओ शोहरतगढ़ पंकज कुमार पांडेय ने बताया कि जांच कर कर कार्रवाई की जाएगी।
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हादसे के बाद आक्रोशित हुए ग्रामीण
सड़क हादसा होने के बाद रमवापुर तिवारी गांव के लोग आक्रोशित होकर शोहतगढ़-खुनुवां मार्ग पर पहुंच गए और प्रशासन का विरोध करने लगे। उनका कहना था कि तस्कर इसी प्रकार से वाहन चलाते हैं। नियमित तस्करी हो रही है। इनकी रफ्तार इतनी होती है कि सामने कोई भी आए, उसे टक्कर मारकर निकलने का साहस रखते हैं। लेकिन प्रशासन की ओर से इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं जाती है। लोग सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन शुरू करते उससे पहले उन्हें समझाकर पुलिस कर्मियों ने मामले को किसी तरह से शांत करवा दिया।
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तस्कर का फैला है जाल, ले सकते हैं किसी की भी जान
लोगों के मुताबिक लगभग 15 से अधिक तस्कर नेपाल-भारत सीमा से सटे सीमावर्ती गांव के है। जिनके 30 से अधिक कैरियर हैं। कैरियर जिस बाइक से तस्करी का माल सीमावर्ती गांव पहुंचाते हैं। वह बाइक व उसका पेट्रोल तस्करों की होती है। कैरियरों को सिर्फ प्रति चक्कर, जिसमें तीन बोरी यूरिया व डाई खाद लादकर पहुंचाने के एवज में मात्र सौ रुपये ही मिलता है। कैरियर तस्करों के सेट खाद, खाद्यान्न की दुकानों पर पहुंचकर तस्कर का नाम लेते ही माल मुहैया हो जाता है। तस्कर खासकर किशोरों को अपने जाल में फंसाते हैं। इसलिए उन्हें अधिक रुपये कमाने का सब्जबाग दिखाकर अधिक चक्कर लगवाते हैं। कैरियर दिनभर बिना ड्राइविंग लाइसेंस व गाड़ी कागज के माल लादकर फर्राटा भरते हैं। कैरियर दिनभर सामानों को सीमावर्ती सटे गांवों में बाइक से लाकर जमा करते हैं। जैसे ही सुरक्षा एजेंसी के जवान अपनी ड्यूटी बदलते हैं। तस्कर इन्हीं नाबालिग कैरियरों से सामान नेपाल की सीमा में पहुंचा देते हैं।
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बड़ी गाड़ियों का भी होता है तस्करी में प्रयोग
लोगों का कहना है कि बड़ी खेप सेटिंग होने के बाद ही बाॅर्डर पार होती है। पूरे दिन सामान एकत्र होता है। इसके बाद देर रात में उसे बाॅर्डर पार करवाया जाता है। दोनों तरफ तगड़ी सेटिंग के बाद यह खेल तस्कर खेलते हैं। अगर रात में कोई गाड़ी के सामने आ जाए तो उसे उड़ाने से डरेंगे नहीं। हालांकि अभी तक कोई ऐसी घटना सामने नहीं आई है। पर मौजूदा समय में जो स्थिति बनी है, अगर तस्करों पर शिकंजा नहीं कसा गया तो बड़ी घटना होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। लेकिन प्रशासन इस पर खामोश है।
बोले ग्रामीण
तस्करों को समझाने के बाद भी उनके कैरियर प्रतिदिन बेरोकटोक खाद लादकर तेज रफ्तार से मोटरसाइकिल से जा रहे हैं। आए दिन स्कूली बच्चे व राहगीर हादसे के शिकार हो रहे हैं। वह भी तस्करों के कैरियरों की बाइक से का शिकार हो चुके। उच्चाधिकारियों से लगातार शिकायत के बावजूद तस्करी रुकने का नाम नहीं ले रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र की जनता परेशान हैं।
संजय राजभर, रमवापुरवा तिवारी
सीमावर्ती क्षेत्र के गांवों के किसान सीजन में खाद के लिए परेशान होते हैं। समय से खाद की दुकानों पर खाद नहीं मिलता। वही बार्डर पर तीन सुरक्षा एजेंसियों की मौजूदगी के बावजूद तस्करी रुक नहीं रही हैं। इस पर लगाम लगाना निहायत ही जरूरी है।
बाल गोविंद पटेल, निवासी रमवापुर तिवारी