सीएमओ, डिप्टी सीएमओ और निजी अस्पताल के संचालक के बीच लेनदेन की बातचीत की वीडियो वायरल होने का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सीएमओ डॉ. बीके अग्रवाल और निजी अस्पताल के संचालक के बीच बीच बातचीत का वीडियो वायरल होने के मामले में अब कार्यशैली में झोल से परदा उठा रहा है। सीएमओ और डिप्टी सीएमओ डॉ. एमएम त्रिपाठी एवं डॉ. बीएन चतुर्वेदी आमने-सामने हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने डिप्टी सीएमओ ब्रजेश पाठक के ट्वीट के बाद लगातार छापा मारा, लेकिन कई निजी अस्पतालों व जांच सेंटरों के खिलाफ केस नहीं दर्ज कराया गया।
डिप्टी सीएमओ डॉ. एमएम त्रिपाठी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा था कि जिस दिन उन्होंने शहर के मारिया हॉस्पिटल में छापा मारकर सील किया था, उसी दिन उन्हें धमकी मिली थी। इस मामले की चैटिंग उन्होंने सीएमओ से की थी, लेकिन सीएमओ की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 2 अगस्त को मारिया हॉस्पिटल में छापा मारा था, जिसमें अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नहीं था। सर्जरी के मरीज भर्ती थे और अल्ट्रासाउंड मशीन से जांच होने की पुष्टि हुई थी। इस मामले में एक माह बाद भी केस दर्ज नहीं किया गया है, जबकि छापा मारने वाली टीम में एसडीएम डॉ. ललित कुमार मिश्र भी थे।
इसी प्रकार शहर के मुस्कान अजरा हॉस्पिटल, सिंह अल्ट्रासाउंड उसका बाजार, नवजीवन हॉस्पिटल शोहरतगढ सहित कई अस्पतालों व जांच सेंटरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की ओर से केस नहीं दर्ज कराने की बात सामने आई है।
इस मामले में नोडल अफसर डिप्टी सीएमओ डॉ. एमएम त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने छापा मारकर रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी थी, सीएमओ की ओर से केस दर्ज कराया जाना चाहिए था, जबकि सीएमओ डॉ. बीके अग्रवाल ने कहा कि सीएमओ की व्यस्तता अधिक रहती है। इसमें नोडल अफसर को रूचि लेकर केस दर्ज कराना चाहता था। जो संचालक सील तोड़कर अस्पताल चलाएंगे, उनके खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा।
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दो जांच रिपोर्ट से तय होंगे आरोप
सीएमओ और निजी अस्पताल के संचालक के बीच बातचीत के वीडियो वायरल होने के मामले में दो स्तर पर जांच की जा रही है। जिलाधिकारी संजीव रंजन के आदेश पर मुख्य विकास अधिकारी जांच कर रहे हैं, जबकि पुलिस अधीक्षक अभिषेक अग्रवाल के आदेश पर एएसपी सिद्धार्थ जांच कर रहे हैं। दोनों जांच पूरी होगी तो रिपोर्ट से आरोप तय होंगे। सोमवार तक जांच रिपोर्ट सामने आने की संभावना है।