सिद्धार्थनगर। दस वर्ष पहले खाद्य आपूर्ति विभाग में आपूर्ति-वितरण में हुई गड़बड़ियों की पड़ताल तेज हो गई है। गुरुवार को एसआईटी (विशेष जांच दल) ने जिले में डेरा डाल दिया है। संबंधित विभागों से तात्कालिक दस्तावेज तलब किए। टीम घंटों तक आपूर्ति और विपणन विभाग में जमी रही। इसे लेकर संबंधित अफसरों-कर्मचारियों में अफरा-तफरी मची रही।
वर्ष 2005-06 में प्रदेश स्तर पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई थी। खाद्यान्न के आवंटन, उठान और कार्डधारकों में वितरण में लंबा खेल होने की शिकायत के बाद शासन ने एसआईटी का गठन किया था। जांच के घेरे में सिद्धार्थनगर भी शामिल है। इसे लेकर एसआईटी पहले भी जिले में आ चुकी है। गुरुवार को भी दोपहर एसआईटी के लोग यहां धमक पड़े। पहले विपणन विभाग पहुंचे। यहां से वर्ष 05-06 के डिस्पैच रजिस्टर सहित अन्य दस्तावेज लेते हुए आपूर्ति कार्यालय पहुंचे। टीम ने यहां से भी कई दस्तावेज मांगे।
पुराने रजिस्टर ढूंढने में विभागीय कर्मचारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। घंटों तक टीम के सदस्य कार्यालय में ही डटे रहे। जांच की रफ्तार तेज होने के साथ तत्कालीन अफसरों-कर्मचारियों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होने लगी है। जिला पूर्ति अधिकारी देवमणि मिश्र ने भी एसआईटी के आने की पुष्टि की। बताया कि टीम एक पुराने मामले की छानबीन के सिलसिले में आई है। उन्हें कुछ दस्तावेज चाहिए थे, जो उपलब्ध करा दिए गए हैं।