जिले में तलाशा जा रहा सिमी का मॉड्यूल
पुलिस मुख्यालय से मांगी गई तीन व्यक्तियों की सूचना, एक युवक डुमरियांगज, दो इटवा के निवासी
दस साल पहले आजमगढ़ में पकड़े गए थे तीनों संदिग्ध
नीरज मिश्र
सिद्धार्थनगर। पुलिस मुख्यालय लखनऊ से तीन लोगों की सूचना मांगे जाने के बाद जिले में सिमी के मॉड्यूल की तलाश शुरू हो गई है। सूत्रों की माने तो करीब 10 साल पहले आजमगढ़ के बिलरियागंज के एक मदरसे में तीनों पढ़ते थे। इन्हेें उस वक्त लखनऊ से आई एक विशेष टीम ने गिरफ्तार किया था। इस मामले में लखनऊ में केस भी दर्ज किया गया था। उस वक्त तीनों सिमी से जुड़े बताए जा रहे थे। इसमें एक डुमरियागंज और दो इटवा क्षेत्र के हैं।
भारत नेपाल सीमा पर तैनात होने के कारण जिला हमेशा से ही संवेदनशील रहा है। पूर्व में बढ़नी बॉर्डर से इंडियन मुजाहिद्दीन छोटू उर्फ सलमान, बब्बर का खालसा का माखन सिंह जैसे लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। डुमरियागंज में एसबीआई की चेस्ट करेंसी से चार करोड़ रुपये की जाली करेंसी भी बरामद हो चुकी है।
सूत्रों की माने तो पूर्व में लखनऊ में दर्ज केस में अभी भी ट्रायल चल रहा है। इस बीच मुख्यालय से उन तीनों व्यक्तियों की सूचना मांगी गई है कि वह मौजूूदा समय में क्या कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि एक युवक डुमरियागंज में कॉपी और किताब की दुुकान चलाता है। इटवा क्षेत्र के दो अन्य युवकों का आना-जाना मुंबई लगा रहता है। नेपाल में भी आने-जाने की सूचना है। ऐसे में तीनों पर निगाह रखी जा रही है।
टेरर फंडिंग के खुलासे के बाद बढ़ी सतर्कता
लखीमपुर खीरी में टेरर फंडिंग का मामला अभी हाल में ही सुर्खियों में रहा है। एटीएस ने लखीमपुर खीरी से जिन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था। उन लोगों ने यह स्वीकार भी किया था कि बॉर्डर के जितने भी जिले है। वहां पर उनके मजबूत नेटवर्क हैं। नेपाल सीमा से सटे जिलों में श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, बहराइच और बिहार के मधुबनी, सीतामढ़ी, पूर्णिया जैसे जिलों के नाम भी सामने आए थे। इतना ही नहीं करीब आठ से नौ माह पूर्व बढ़नी के एक बैंक में एक खाताधारक के अकाउंट में पाकिस्तान से रुपये आने क
ी जानकारी भी खुफिया एजेंसी मांग चुकी है।