शोहरतगढ़। किसान एक बोरी यूरिया पाने के लिए समितियों और उर्वरक की दुकानों का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें यूरिया नहीं मिल पा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ तस्कर बाइक से यूरिया को नेपाल पहुंचा रहे हैं।
शनिवार को तड़के झरुआ गांव से सरयू नहर के रास्ते नेपाल ले जा रहे दो बाइक सवार तस्कर छह बोरी यूरिया ले जा रहे थे। तभी धनौरा मुस्तहकम गांव के लोगों ने उन्हें दौड़ा लिया। तस्कर बाइक और यूरिया छोड़कर नेपाल की तरफ भाग गए।
गांव वालों ने इसकी सूचना एसडीएम राहुल सिंह व एसएसबी निरीक्षक विश्व दीपक त्रिपाठी को दी दी। एसएसबी के जवानों ने दो बाइक, जिसमें एक बाइक नेपाली नंबर प्लेट अंकित था और छह बोरी यूरिया को कस्टम खुनुवां को सौंप दिया। ग्रामवासी अशरफ, जाकिर, जावेद अहमद, उस्मान, अंकित, रमजान, उत्तम घनश्याम, उमाकांत, जुनैद आदि ने कहा कि धनौरा, कोटिया अलगा, कपसिहवा, परसौना आदि सीमावर्ती क्षेत्रों से यूरिया की तस्करी धड़ल्ले से हो रही है।
उन्होंने कहा कि महथा, बानगंगा, गनेशपुर और सिसवा चौराहा पर स्थित कुछ उर्वरक विक्रेता तस्करों को चार सौ रुपये प्रति बोरी की दर से बेच रहे हैं।
तस्कर बाइक पर यूरिया रखकर नेपाल पहुंचा रहे हैं। नेपाल में एक बोरी यूरिया दो हजार रुपये में बिक जाता है। इसी कारण यूरिया की धुआंधार तस्करी हो रही है। गांव वालों ने कहा कि उर्वरक विक्रेताओं की जांच केवल खानापूर्ति तक सीमित है।
तस्करी कराने में विभाग और पुलिस की मिलीभगत से इन्कार नहीं किया जा सकता है। तहसील क्षेत्र के किसान एक बोरी यूरिया पाने के लिए कड़ी धूप में घंटों लाइन में खड़े रहते हैं।
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