- चकबंदी के विरोध में उतरे ग्रामीण, अधिकारियों को सौंपा लिखित बयान
- गैड़ाखोर ग्राम पंचायत में आयोजित चौपाल में ग्रामीणों ने जताई आपत्ति, चकबंदी प्रक्रिया नहीं कराने का किया अनुरोध
सिद्धार्थनगर। खेसरहा क्षेत्र के गैड़ाखोर ग्राम पंचायत में चकबंदी को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया है। बृहस्पतिवार को पंचायत भवन में आयोजित अधिकारियों की चौपाल में ग्रामीणों ने चकबंदी का विरोध जताया। इस संबंध में उन्होंने अधिकारियों को लिखित बयान देकर प्रक्रिया रोकने का अनुरोध किया।
उपजिलाधिकारी बांसी विश्वामित्र सिंह और चकबंदी विभाग की बंदोबस्त अधिकारी रानी गरिमा जायसवाल के नेतृत्व में आयोजित चौपाल में ग्रामीणों ने अपनी आपत्तियां रखीं। उनका कहना था कि गांव में वर्ष 2023 से चकबंदी प्रक्रिया चल रही है, जबकि किसी भी ग्रामीण ने इसके लिए लिखित आवेदन नहीं किया है। गैड़ाखोर ग्राम पंचायत में सेमरहना, गैड़ाखोर और परसा बुजुर्ग तीन गांव शामिल हैं। इनमें परसा बुजुर्ग गैर आबाद है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब गांव में चकबंदी की मांग ही नहीं की गई तो इसकी प्रक्रिया क्यों कराई जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में पर्याप्त ग्राम समाज की जमीन उपलब्ध है। पंचायत भवन, पेयजल व्यवस्था, सुलभ शौचालय और राशन वितरण केंद्र सहित कई सरकारी भवन पहले से बने हैं। खेतों तक पहुंचने के लिए चकरोड और चकनाली की भी पर्याप्त व्यवस्था है। ऐसे में गांव में चकबंदी की जरूरत नहीं है।
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि चकबंदी के दौरान सरकारी कटौती से गरीब किसानों के पास बची थोड़ी-बहुत जमीन भी कम हो जाएगी। उन्होंने पास के गांव का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां पिछले वर्ष चकबंदी के दौरान अधिक जमीन की कटौती हुई थी। इसके चलते कई ग्रामीण मुकदमेबाजी में उलझ गए। ग्रामीणों ने अधिकारियों से उनकी मांग पर विचार कर चकबंदी प्रक्रिया नहीं कराने का अनुरोध किया।
इस दौरान चकबंदी अधिकारी राजेंद्र प्रसाद यादव, रफीक अहमद, सुनील कुमार, एहतेशाम अहमद आदि मौजूद रहे।