सिद्धार्थनगर/शोहरतगढ़। अवैध तरीके से रेलवे लाइन पार करने और हादसाें को रोकने के लिए रेल प्रशासन की ओर से अंडरपास का निर्माण कराया जा रहा है। गांवों के लोगों राहत देने के लिए बनाए गए अंडरपास से सुविधा मिलने की जगह लोगों की मुसीबत बढ़ गई है।
बीते दिनों मड़नी गांव के पास रेलवे अंडरपास बनाने के विरोध में ग्राम प्रधान की अगुवाई में ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया था। ऐसे में अंडरपास की हकीकत परखने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने पड़ताल की, जिसमें चौंका देने वाले मामले सामने आए।
पूर्व में शोहरतगढ़ से बढ़नी रेलवे लाइन के बीच बने अंडरपास की पड़ताल की गई तो अंडरपास में पानी भरा मिला। लोगों ने बताया कि अंडर पास से साल के आठ महीने ऐसे ही हालात बने रहते हैं। चार से छह किलोमीटर घूमकर आना-जाना पड़ रहा है। वहीं मड़नी गांव के पास समपार फाटक बंद कर रेलवे विभाग अंडरपास प्रस्तावित निर्माण को लेकर ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है था कि अंडरपास बन जाने से विकास की गति रुक जाएगी।
बरसात में आने-जाने में दिक्कत होगी। इस के एक मार्ग होने के नाते फसल कटाई के लिए कंबाइन सहित भारी वाहन नहीं आ सकेंगे, जिससे बहुत परेशानी हो जाएगी। इसको लेकर ग्रामीणों ने सांसद सहित डीएम, एसडीएम और रेलवे विभाग के अधिकारियों से अंडरपास नहीं बनने की गुहार लगाई है।
कहा कि अंडरपास बना तो सभी ग्रामीण गांव छोड़कर चले जाएंगे, जिसकी जिम्मेदारी रेलवे विभाग सहित जनप्रतिनिधियों व जिला प्रशासन की होगी।
नेपाल सीमा से सटा हुआ है मड़नी अंडरपास : बढ़नी क्षेत्र के मड़नी गांव नेपाल सीमा से सटा हुआ है। इस गांव सहित क्षेत्र के अन्य गांवों इस सड़क आवाजाही कर बढ़नी, बलरामपुर, जिला मुख्यालय सहित आदि स्थानों पर आते-जाते हैं। इसके अलावा इस क्षेत्र में हजारों एकड़ कृषि योग्य जमीन है, जिसपर लोग खेती-बारी करते हैं। इसी वजह से रेलवे के समपार फाटक पर अंडरपास बनने का ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। क्षेत्र के राजेंद्र यादव, संजय कुमार, लक्ष्मी, सुनील यादव, अतीकुर्रहमान, जावेद खान, अखिलेश ने कहा कि गोरखपुर से गोंडा तक पहले छोटी लाइन थी। तब से समपार फाटक यहां है। यह लाइन जब बड़ी लाइन में तब्दील हुई थी, उसी दौरान गांव के लोगों ने रेलवे विभाग के अधिकारियों पत्र लिखकर समस्याओं से अवगत कराते हुए समपार फाटक की मांग की थी। उसके बाद रेलवे ने यहां समपार फाटक बनाया है। बीते दिनों रेलवे विभाग की टीम यहां अंडरपास बनाने पहुंची तो ग्रामीणों ने उनसे अंडरपास की परमिशन के कागजात मांग लिए। नहीं दिखा पाने पर ग्रामीणों ने विरोध किया। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगाई है।
सिसवा रेलवे लाइन के नीचे भरा पानी। संवाद