-भनवापुर क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वैज्ञानिकों ने दी किसानों को सलाह
भनवापुर। जिन खेतों में तना छेदक कीट की समस्या होती है, वहां पर यह कीट जुलाई से अक्टूबर तक अधिक नुकसान पहुंचता है। सबसे अधिक नुकसान सितंबर से अक्टूबर के बीच में होता है। बाली निकलने की अवस्था में कीट का प्रकोप होने पर बालियां सूख जाती हैं। इनमें दाने नहीं बनते हैं। बालियां सफेद दिखाई देती हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सर्वजीत ने बताया कि कीट की समस्या होने पर किसान 7.5 किलोग्राम कारटापहाईड्रो क्लोराइड या चार किलो फीप्रोनिल अथवा क्लोरेंट्रानिलिप्रोल, थायमेथोक्सम 2.5 किलो प्रति एकड़ रोपाई के 30 वा 50 दिन बाद करें। उन्होंने बताया कि जिन खेतों में रेड वर्म (पतले केंचुआ जैसा जीव) की समस्या हो वहां पर क्लोरापायरीफॉस 50 प्रतिशत ईसी 30 मिली टंकी का छिड़काव करें। इससे कीटों का प्रकोप कम हो जाएगा और बेहतर उत्पादन होगी।