सिद्धार्थनगर। डिजिटल लेनदेन पर निर्भरता बढ़ने के साथ ही साइबर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ठग हर बार नए-नए तरीके से अपराध को अंजाम दे रहे हैं। अब ठग धमकी भरे फोन करके लोगों से रुपये ऐंठ रहे हैं। डुमरियागंज और शोहरतगढ़ में इस तरह के कई मामले सामने आए हैं। इसमें ठग पुलिस बनकर कॉल कर रहे हैं और बोल रहे हैं कि आपके भाई पर गंभीर एफआईआर दर्ज हो चुकी है। टीम निकल चुकी है, दरवाजे पर पुलिस पहुंचने वाली है। ऐसे धमकी भरे कॉल डुमरियागंज और पथरा थाना क्षेत्र के कई लोगों के पास आ चुका है। इससे लोग दहशत में हैं।
खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले साइबर ठग कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का भय दिखाकर एफआईआर के तुरंत निस्तारण के नाम पर रुपये मांगते हैं। ठग इतनी सटीक जानकारी के साथ बात करते हैं कि सामने वाला कुछ पल के लिए भरोसा कर लेता है। इसी डर और जल्दबाजी का फायदा उठाकर अब तक दो लोगों से ठगी की जा चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों को भी इसी तरह की कॉल आ चुकी हैं।
फोन पर धमकी देकर मांगे आठ हजार रुपये: डुमरियागंज थाना क्षेत्र के गांव में बुधवार की शाम कैथवलिया निवासी एक व्यक्ति के मोबाइल पर एक फोन आया। फोन करने वाले ने कहा कि आप गलत काम करते हैं और आपके ऊपर एफआईआर दर्ज कराई गई है। जल्दी ही पुलिस आपके घर पर पहुंचेगी। एफआईआर से बचने के लिए भेजे जा रहे स्कैनर पर 8000 रुपये भेज दो। डर के मारे उक्त व्यक्ति के परिवार वालों ने अपने पड़ोसियों को जानकारी दी। उस नंबर पर जब दोबारा फोन मिलाया गया तो नॉट रिचेबल बताने लगा। ठगी का एहसास होने पर रुपये नहीं दिए।
मुकदमे का डर दिखाकर ठग लिए 5 हजार रुपये: करीब एक माह पहले शहर के निवासी एक व्यक्ति के पास कॉल आया और बताया गया कि उसके बेटे पर नोएडा में एफआईआर दर्ज हुई है। तत्काल 50 हजार रुपये दीजिए। संयोग ऐसा कि संबंधित व्यक्ति का बेटा नोएडा में ही पढ़ रहा था। इससे उक्त व्यक्ति डर गया और तत्काल पांच हजार रुपये भेज दिए। रुपये भेजने के लिए दूसरे से रुपये मांगे तो उसने वजह पूछी। जब पीडि़त ने पूरी बात बताई तो, उन्हें जानकारी दी गई कि ठग उन्हें कॉल कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने उसी नंबर पर कॉल करना शुरू किया तो नंबर बंद आने लगा। इसके बाद फिर कॉल आया तो उसे ब्लॉक कर दिया। ऐसेे करते हैं ठगी : साइबर एक्सपर्ट का मानना है कि आज लोग सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा कर देते हैं। यही कारण है कि ठग कहीं न कहीं उसी को जानकारी हासिल करते हैं। सोशल मीडिया, डाटा लीक से नाम, पता, रिश्तेदार की जानकारी लेते हैं। इसके बाद फर्जी पुलिस पहचान, कड़क आवाज और धमकी भरे लहजे में बात करते हैं।