- मेडिसिन के ओपीडी में सीने के दर्द के मरीजों की संख्या में हुआ इजाफा
- ठंडक में धमनियों के सिकुड़ने से बढ़ रही समस्या, सुन्नपन, लकवा जैसी स्थिति पर तत्काल इलाज की दे रहे सलाह
सिद्धार्थनगर। कड़ाके की ठंड का असर लोगों की सेहत पर डालना शुरू कर दिया है, इससे हृदय रोग, सांस की तकलीफ और ब्रेन स्ट्रोक से जुड़े मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। चिकित्सकों के अनुसार सर्द मौसम में धमनियां सिकुड़ जाती हैं, इससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी हार्ट अटैक का कारण बन सकती है।
वर्तमान समय में ओपीडी में आठ से 10 मरीज इस लक्षण के आ रहे है, जिन्हें जांच के बाद इलाज का सलाह दी जा रही है। मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव दुबे ने बताया कि ठंड में प्यास कम लगने के कारण लोग पानी कम पीते हैं। इससे खून गाढ़ा हो जाता है। यह स्थिति हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ा देती है। उन्होंने कहा कि ऐसे में बिना प्यास लगे भी नियमित अंतराल पर गुनगुना पानी पीते रहें।। इससे शरीर में रक्त संचार बेहतर रहता है और जोखिम कम होता है। उन्होंने कहा कि ठंड में दिल और दिमाग की सेहत पर कोहरा और स्मॉग दोहरा वार कर रहे हैं। ऐसे में ठंड का सीधा असर धमनियों पर पड़ता है।
सर्द मौसम में धमनियां सिकुड़ जाती हैं, इससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है जबकि लोग पसीना नहीं आने और प्यास कम लगने के कारण लोग पानी कम पीते हैं, इससे खून गाढ़ा हो जाता है। गाढ़ा रक्त क्लॉट बनाकर हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक की आशंका बढ़ा देता है। नींद के दौरान दिल की धड़कन धीमी पड़ जाती हैं। कई मामलों में अचानक कार्डियक अरेस्ट तक की स्थिति बन जाती है। इसी वजह से सर्दियों में रात के समय हार्ट अटैक के मामले अधिक सामने आते हैं।
सही खान-पान से होगी सुरक्षा
मेडिसिन के डॉ. जितेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि इस मौसम में सही खानपान दिल की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है। मल्टीग्रेन आटा, अलग-अलग कोल्ड प्रेस्ड तेल, मौसमी फल-सब्जियां, मेवे और हल्का प्रोटीन दिल को मजबूत रखते हैं। लाल मिर्च, मैदा, फास्ट फूड और मीठे पेय से दूरी बनाना जरूरी है। घर में एयर प्यूरिफायर लगाना या ऑक्सीजन देने वाले इनडोर पौधे रखना भी लाभकारी हो सकता है।
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सुन्नपन और लकवा जैसी स्थिति को अनदेखा न करें
डॉ. गौरव दुबे ने बताया कि हृदय, फेफड़े और गठिया-बाय के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। तीन-चार लेयर में कपड़े पहनें और गर्दन व सिर को भी ढककर रखें। इससे सुन्नपन की समस्या से काफी राहत मिलेगी। लकवा जैसी स्थिति में कोताही न बरतें। डॉक्टर को दिखाएं।
शराब और सिगरेट से दूरी, बेहद जरूरी
चिकित्सकों के अनुसार स्वस्थ व्यक्ति भी चलने पर हांफने लगते हैं, ऐसे में हृदय रोगियों के लिए यह स्थिति और खतरनाक है। चिकना, तला-भुना और मसालेदार भोजन छोड़कर हल्का और सुपाच्य आहार लें। शुगर और बीपी के मरीज नियमित दवा लें और अपनी जांच कराते रहें। सर्दी में धूम्रपान और शराब दिल के लिए सबसे खतरनाक साबित हो सकते हैं। शराब शरीर का तापमान गिराती है, जिससे ठंड का असर बढ़ता है।