भनवापुर। ब्लाॅक क्षेत्र के नवेल में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का बुधवार की रात में समापन हुआ। अंतिम दिन कथाव्यास उत्तम कृष्ण शास्त्री ने कथा का सारांश बताकर जीवन को जीने की कला भी समझाई। उन्होंने कई उपदेशात्मक वृतांत सुनाकर भक्तों को भावविभोर कर दिया।
कथावाचक उत्तम कृष्ण शास्त्री ने बताया कि मनुष्य का जीवन कई योनियों के बाद मिलता है। कथा वाचक ने सूर्यदेव से सत्रजीत को उपहार स्वरूप मिली मणि का प्रसंग सुनाते हुए मणि के खो जाने पर जामवंत और श्रीकृष्ण के बीच 28 दिन तक चले युद्ध और फिर जामवंती, सत्यभामा समेत से श्रीकृष्ण सभी आठ विवाह की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि कैसे प्रभु ने दुष्ट भौमासुर के पास बंदी बनी हुई 16 हजार 100 कन्याओं को मुक्त करवाया और उन्हें अपनी पटरानी बनाकर उन्हें मुक्ति दी। गोवध का विरोध और गोसेवा करने पर भी जोर दिया। कथा समापन कार्यक्रम के बाद हवन और फिर प्रसाद वितरित किया गया।
इस दौरान ठाकुर प्रसाद सोनी, विमला सोनी, पवन कुमार, शशिकांत शास्त्री, वेदप्रकाश शास्त्री आदि मौजूद रहे।