- भारत-नेपाल सीमा के बढ़नी बॉर्डर पर बैग और अन्य सामान की जांच के लिए डिजिटल मशीन का इस्तेमाल शुरू
- सीसीटीवी निगरानी के साथ अब सामान की डिजिटल जांच पर जोर, तस्करी और संदिग्ध गतिविधियों पर अंकुश लगाने की तैयारी
सिद्धार्थनगर। खुली सीमा, बेरोकटोक आवाजाही और तस्करी की चुनौतियों के बीच भारत-नेपाल सीमा पर अब सुरक्षा का दायरा तकनीक के सहारे मजबूत किया जा रहा है। बढ़नी बॉर्डर पर यात्रियों के बैग और अन्य सामान की जांच के लिए डिजिटल स्कैनर मशीन का इस्तेमाल शुरू हो गया है। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी और नियमित गश्त के साथ जांच व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर है। इसका उद्देश्य तस्करी, अवैध घुसपैठ और संदिग्ध गतिविधियों पर अंकुश लगाना है।
बढ़नी बॉर्डर पर एयरपोर्ट की तर्ज पर डिजिटल स्कैनर से बैग, झोले, बोरियों और सूटकेस समेत अन्य सामान की जांच की जा रही है। यात्रियों के सामान को मशीन से गुजारकर उसकी स्क्रीनिंग की जाती है। इसके साथ ही संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरों और डॉग स्क्वाड की मदद ली जा रही है। इससे सामान में छिपाकर ले जाई जाने वाली संदिग्ध वस्तुओं की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
सिद्धार्थनगर जिले की करीब 68 किलोमीटर लंबी सीमा नेपाल से लगी है। बढ़नी, खुनुवां, ककरहवा और अलीगढ़वा प्रमुख आवागमन केंद्र हैं। खुली सीमा के कारण कई स्थानों पर गांव और खेत सीधे सीमा से सटे हैं। ऐसे में निगरानी और सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती बनी रहती है। एसएसबी के जवान चौकियों पर तैनाती के साथ नियमित गश्त भी करते हैं।
दो प्रमुख केंद्रों से होता है व्यापार
जिले के बढ़नी और खुनुवां बॉर्डर से व्यापारिक वाहनों की आवाजाही होती है। खाद्यान्न समेत आवश्यक वस्तुओं का परिवहन भी इन्हीं मार्गों से किया जाता है। इसके अलावा रिश्तेदारों से मिलने, पर्यटन और बस सेवा के माध्यम से बड़ी संख्या में लोग सीमा पार करते हैं। ककरहवा और अलीगढ़वा भी आवागमन के प्रमुख केंद्र हैं। ऐसे में सुरक्षा जांच के साथ वैध यात्रियों और व्यापारिक गतिविधियों को सुचारु बनाए रखना भी जरूरी है।
तस्करी और अवैध घुसपैठ रोकने पर जोर
भारत-नेपाल सीमा पर पिछले कुछ वर्षों में तीसरे देशों के नागरिकों के बिना वैध वीजा प्रवेश करने के मामले सामने आए हैं। इसके अलावा सोना, चांदी, मादक पदार्थों और भारतीय मुद्रा की तस्करी भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई है। इसी को देखते हुए सीमा पर चौकसी बढ़ाई जा रही है। एसएसबी की चौकियों पर जवान तैनात हैं और स्थानीय पुलिस के साथ नियमित गश्त की जा रही है।
सीमा पर आधुनिक निगरानी प्रणाली की तैयारी
भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए आधुनिक सीमा प्रबंधन प्रणाली लागू करने की योजना की जानकारी सामने आई है। इसके तहत एक्स-रे बैग स्कैनर और फुल बॉडी स्कैनर की स्थापना, संदिग्ध लोगों का डिजिटल रिकॉर्ड, जैविक पहचान आधारित अभिलेख और एकीकृत नियंत्रण और निगरानी केंद्र जैसी व्यवस्थाओं पर काम किए जाने की बात कही गई है। खुनुवां बॉर्डर पर इलेक्ट्रॉनिक जांच मशीन के ट्रायल और ककरहवा और अलीगढ़वा में स्कैनर लगाने की तैयारी की भी जानकारी है। हालांकि, इन व्यवस्थाओं की मौजूदा स्थिति, स्वीकृति और क्रियान्वयन की समयसीमा की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
दुर्गा पूजा को लेकर एसएसबी अलर्ट
शारदीय नवरात्र और दुर्गा पूजा को देखते हुए बढ़नी सीमा पर एसएसबी के जवान विशेष सतर्कता बरत रहे हैं। आने-जाने वाले लोगों, वाहनों और सामान की जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही हैं, ताकि त्योहार के दौरान शांति और कानून-व्यवस्था बनी रहे।
बोले जिम्मेदार
नई व्यवस्था का उद्देश्य अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के साथ वैध यात्रियों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाना है। सीमा क्षेत्र को एकीकृत नियंत्रण एवं निगरानी केंद्र से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने पर सुरक्षा बल तत्काल कार्रवाई कर सकें। डिजिटल निगरानी से जांच व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाएगा।
- संतोष मासुले, सहायक कमांडेंट, एसएसबी 43वीं वाहिनी, खुनुवां बॉर्डर
सीमा पर हर व्यक्ति, वस्तु और वाहन की जांच की जा रही है। बैग, झोले, सूटकेस और अन्य सामान की जांच डिजिटल स्कैनर से की जा रही है। जांच में डॉग स्क्वाड की भी मदद ली जा रही है। दुर्गा पूजा और नवरात्र को देखते हुए बढ़नी सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। जवान पूरी मुस्तैदी से निगरानी कर रहे हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
- भूषण जाधव, सहायक कमांडेंट, एसएसबी 50वीं वाहिनी, जी कंपनी, बढ़नी