सिद्धार्थनगर। उत्तर पश्चिमी हवा के चलते तराई का मौसम सर्द बना हुआ है। शनिवार को भी तीन से पांच किलोमीटर बर्फीली हवा चलती रही। हालांकि दोपहर एक बजे के बाद धूप खिलने से ठिठुरन से कुछ देर के लिए फौरी राहत जरूर मिली, लेकिन चार बजे के बाद फिर से चल रही शीतलहर ने परेशान बढ़ा दी। सुबह-शाम पड़ रहे कोहरे की वजह से सड़क यातायात व्यवस्था प्रभावित रही।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, अयोध्या और आसपास के जिलों में लगातार शीतलहर का प्रभाव बना हुआ है। अधिकतम तापमान 16.1 जबकि न्यूनतम तापमान 8.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आर्द्रता अधिकतम 94 प्रतिशत और न्यूनतम 79 प्रतिशत रही।
मौसम विज्ञानी डॉ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि सिद्धार्थनगर समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश में बदली और कोहरा छाए रहने की संभावना है। औसत तापमान सामान्य से नीचे रहने और हवा की गति सामान्य रहने के कारण फिलहाल शीतलहर से निजात मिलने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में बुजुर्ग, बच्चे और पहले से बीमार लोगों को ठंड से बचाव के लिए सतर्क रहने की सलाह दी गई है। किसानों को भी फसलों की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय करने की आवश्यकता है, क्योंकि लगातार ठंड और कोहरे से रबी फसलों, जैसे गेहूं, सरसों और आलू, को नुकसान पहुंचने का खतरा है।
गेहूं के लिए ऑक्सीजन, सब्जी के लिए खतरा: कृषि विज्ञानी मार्कंडेय सिंह बताते हैं कि शीतलहर गेहूं की फसल के लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। जितनी कड़ाके की ठंड पड़ेगी, उतना ही गेहूं की अच्छी पैदावार होगी। अरहर, सरसों, मटर, आलू और अन्य सब्जियों की फसल के लिए यह शीत लहर खतरनाक है। इन पर पाला लगने की आशंका है। फफूंदी लग सकती है। पत्तियां सफेद हो जाएंगी। ऐसे में फसल के बर्बाद होने की आशंका बनी रहेगी। इससे बचाने के लिए किसानों को खेतों के चारों तरफ सूखी पत्तियां, पुआल या लकड़ी डंडिया जलाकर ढक देना चाहिए ताकि धुआं से खेतों में फैले। इससे चार डिग्री तक तापमान बढ़ जाता और फसल को पाला रोग से बचाता है। इससे शाम के वक्त ताजे पानी से खेतों की सिंचाई करनी चाहिए। फसलों को फफूंदी रोग से बचाव के लिए दवा का छिड़काव करना चाहिए।
किसान ऐसे करें बचाव: कृषि विज्ञानी डॉ. मार्कंडेय सिंह के अनुसार कड़ाके की ठंड में आलू की फसल में झुलसा रोग लगने का खतरा सबसे अधिक है। इस रोग से फसल की पत्तियों में गोल आकार के भूरे धब्बे बन जाते हैं। इससे बचाव के लिए फफूंद नाशक दवा कॉर्वेंडाजिम और मैनकोजेब के मिश्रण का दो ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।