सिद्धार्थनगर। जिले में सड़कों पर घूम रहे छुट्टा पशु राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। जिले में 36 गोशालाओं में 60,183 पशुओं के संरक्षित होने का दावा है। इसके बावजूद सड़कों पर छुट्टा पशुओं की मौजूदगी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
दिन में सड़क किनारे घूमने वाले मवेशी रात होते ही मार्गों पर बैठ जाते हैं। अंधेरे में दिखाई नहीं देने के कारण वाहन चालक इनसे टकराकर हादसे का शिकार हो रहे हैं। बारिश और बाढ़ के बाद समस्या और गंभीर हो गई है। समय रहते पशुओं को संरक्षित नहीं किया गया तो हादसों का खतरा बढ़ सकता है।
जिले के नौ नगर निकायों और ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 36 गोशालाएं संचालित हैं। इनमें 25 ग्रामीण क्षेत्रों और नौ नगर पालिका व नगर पंचायत क्षेत्रों में हैं। इन गोशालाओं में 60,183 पशुओं के संरक्षित होने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद जिले के प्रमुख मार्गों, राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों और चौराहों पर छुट्टा पशु दिखाई देते हैं। इससे किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने के साथ राहगीरों की सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है।
रात में सड़क पर बैठे पशु दूर से दिखाई नहीं देते। वाहन की रोशनी पड़ने पर जब तक चालक को उनके होने का पता चलता है, तब तक देर हो चुकी होती है। अचानक ब्रेक लगाने या वाहन मोड़ने से भी दुर्घटना का खतरा रहता है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति अधिक खतरनाक है। वहीं, तेज रफ्तार वाहनों के सामने पशु आने पर उन्हें नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।
मवेशी से टकराकर युवक की गई थी जान : छह अगस्त की रात उस्का बाजार थाना क्षेत्र के पकड़ी चौराहे के पास सड़क पर आए मवेशी से टकराकर बाइक सवार निखिल यादव (21) की मौत हो गई थी। बांसी कोतवाली क्षेत्र के सोनखर निवासी निखिल जिला मुख्यालय से उस्का बाजार में अपने रिश्तेदार के घर जा रहे थे। पकड़ी के पास अचानक मवेशी सामने आने से उनकी बाइक अनियंत्रित हो गई और हादसे में उनकी जान चली गई।