भवानीगंज। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के बहेरिया गांव में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथावाचक आलोकानंद शास्त्री ने भगवान कृष्ण व रुक्मिणी विवाह के प्रसंग का वर्णन किया। इस दौरान उन्होंने रासलीला का वर्णन, भगवान का मथुरा गमन, कंस वध, संदीपनी आश्रम में विद्या और उद्धव-गोपी संवाद जैसे प्रसंगों का जिक्र किया।
कथावाचक ने बताया कि श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह आदर्श दांपत्य जीवन और प्रेम का प्रतीक है। इसके अलावा श्रीमद्भागवत कथा में रासलीला के संबंध में महारास के पांच अध्याय गाए जाते हैं जो भागवत के प्राण माने जाते हैं। यह जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का रूपक है, जिससे भक्त भवसागर पार कर वृंदावन की भक्ति प्राप्त कर लेते हैं। कथावाचक ने मथुरा गमन प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान का मथुरा प्रस्थान और कंस वध के प्रसंग अधर्म पर धर्म की विजय को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि मनुष्य को हमेशा भक्ति मार्ग पर ही चलना चाहिए, जिससे जीवन सफल हो सके। इस दौरान आचार्य सुमंत शास्त्री, संदीप शास्त्री, इंद्रजीत उपाध्याय आदि मौजूद रहे।्