भवानीगंज। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के बहेरिया गांव में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ कार्यक्रम के अंतिम दिन सोमवार की रात कथावाचक आलोकानंद शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाया। इसे सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए।
कथावाचक ने कहा कि जो भगवान को अपना मित्र बनाता है, भगवान उसके कष्टों को मिटा कर अपने जैसा बना लेते हैं। मित्रता में एक दूसरे का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें कोई छोटा बड़ा नहीं होता। सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा से समझा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र कृष्ण से मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। सुदामा ने द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे, लेकिन द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं। इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है। जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना, सुदामा सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे।
सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया। कृष्ण सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाया। उन्हें कुबेर का धन देकर मालामाल कर दिया। जब भी भक्तों पर विपदा आई है। प्रभु उनका तारण करने अवश्य आए हैं। इस दौरान आचार्य सुमंत शास्त्री, संदीप शास्त्री, इंद्रजीत उपाध्याय आदि मौजूद रहे।