- भनवापुर क्षेत्र के डिवलीडीहा मिश्र में श्रीमद्भागवत कथा का हुआ आयोजन
भनवापुर। ब्लाॅक क्षेत्र के डिवलीडीहा मिश्र में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में बृहस्पतिवार की रात कथावाचक राकेश शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का वर्णन बड़े सुंदर और मार्मिक ढंग से किया, जिसे सुनकर दर्शक भाव विभोर हो गए।
सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कथा व्यास राकेश शास्त्री ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता औरों के लिए उदाहरण है। मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्रीकृष्ण ओर सुदामा की दोस्ती से समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र (सखा) श्रीकृष्ण से मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। सुदामा द्वारिकाधीश के महल का पता पूछकर महल की ओर बढ़ने लगे। द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं। इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है। जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना प्रभु सुदामा सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया, कन्हैया..., कहकर उन्हें गले लगाया। श्रीकृष्ण सुदामा को अपने महल में ले गए ओर उनका अभिनंदन किया।
अंतिम दिन कथाव्यास ने कथा का सारांश कह जीवन को जीने की कला भी समझाई। उन्होंने कई उपदेशात्मक वृतांत सुनाकर भक्तों को निहाल भी किया। उन्होंने बताया कि मनुष्य का जीवन कई योनियों के बाद मिलता है। इसे कैसे जीना चाहिए, यह भी समझाया। कथा वाचक ने सूर्यदेव से सत्रजीत को उपहार स्वरूप मिली मणि का प्रसंग सुनाते हुए मणि के खो जाने पर जामवंत और श्रीकृष्ण के बीच 28 दिन तक चले युद्ध और फिर जामवंती, सत्यभामा समेत से श्रीकृष्ण सभी आठ विवाह की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि कैसे प्रभु ने दुष्ट भौमासुर के पास बंदी बनी हुई 16 हजार 100 कन्याओं को मुक्त करवाया।
इस दौरान गायत्री प्रसाद मिश्र, इंद्रावती देवी, पं. केशवानंद त्रिपाठी, आचार्य अमित पांडेय, पं. शिवपूजन दूबे, पं. राजन शास्त्री आदि मौजूद रहे।