सिद्धार्थनगर। फर्जी नियुक्ति पत्र के सहारे शिक्षक बनकर परिषदीय विद्यालयों में तैनाती पाने का मामला सामने आने के बाद अब पूरे जिले में शिक्षकों के अभिलेखों की जांच होगी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिले में तैनात 5714 शिक्षकों के नियुक्ति पत्र और शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया जाएगा। शिक्षकों को इसके लिए शपथपत्र भी देना होगा। जिले में पहले ही फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल करने के मामले में 129 शिक्षक बर्खास्त हो चुके हैं। ऐसे में नई जांच से संदिग्ध नियुक्तियों की दोबारा पड़ताल होगी।
बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी अभिलेखों के सहारे नौकरी हासिल करने का मामला नया नहीं है। वर्ष 2017-18 में जिले में इस तरह की शिकायतें सामने आने के बाद शासन ने मामले को गंभीरता से लिया था। बड़े गिरोह की संलिप्तता की आशंका पर जांच यूपी एसटीएफ को सौंपी गई। जांच आगे बढ़ी तो फर्जी नियुक्तियों से जुड़े कई मामले सामने आए। इसके बाद संबंधित शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई। अलग-अलग मामलों में मुकदमे दर्ज कराए गए और गिरफ्तारियां भी हुईं। अब तक जिले में 129 शिक्षक बर्खास्त किए जा चुके हैं।
फर्जी नियुक्ति पत्र के सहारे आठ शिक्षकों को मिली थी तैनाती : सितंबर 2024 में भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र में फर्जी नियुक्ति पत्र के आधार पर तैनाती पाने का मामला सामने आया था। जांच में आठ शिक्षकों की नियुक्ति फर्जी पाई गई थी। बताया गया कि इन शिक्षकों ने फर्जी नियुक्ति पत्र के आधार पर विद्यालय आवंटित करा लिए थे और तैनाती भी पा ली थी। कानपुर से जुड़े एक फर्जी नियुक्ति पत्र का मामला सामने आने के बाद जांच आगे बढ़ी तो भनवापुर क्षेत्र में आठ शिक्षकों का प्रकरण उजागर हुआ। मामला खुलने के बाद संबंधित शिक्षक लापता हो गए थे।
इस मामले में खंड शिक्षा अधिकारी की तहरीर पर त्रिलोकपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। प्रकरण में जांच के दौरान शिथिलता बरतने के आरोप में संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को निलंबित भी किया गया था। इस घटना ने नियुक्ति पत्रों के सत्यापन और विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े किए थे।