सिद्धार्थनगर। ढेबरुआ थाना क्षेत्र के परसा देवाईचपार में 26 जुलाई 2017 को पति अर्जुन से तकरार में अनीता ने अपने दो मासूम बच्चों सुरेंद्र (5) और वीरेंद्र (6) तालाब में डुबाकर मौत के घाट उतार दिया था। इस वारदात ने इलाके को झकझोर कर रख दिया था। इससे बच्चों के पिता ने लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कातिल महिला को सजा दिलाई।
नौ साल तक चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट ने महिला को अंतिम सांस तक कारावास की सजा सुनाई जबकि इस जघन्य अपराध में सहयोगी महिला के बहनोई वसंतलाल को तीन वर्ष की सजा सुनाई गई है। पिता अर्जुन ने बताया कि मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और आखिरकार सच्चाई की जीत हुई।
मामला 26 जुलाई 2017 का है। घर में आए दिन होने वाले विवाद और आपसी कलह के बीच उस दिन विवाद इस कदर बढ़ा कि मां ने इंसानियत की सारी हदें पार कर दीं। दोनों मासूम बेटों को घर से बाहर ले जाकर तालाब में डूबो दिया। शुरू में मामले को हादसा दिखाने की कोशिश हुई, लेकिन घटनास्थल की परिस्थितियों और बच्चों की संदिग्ध मौत ने महिला को शक के घेरे में ला खड़ा किया।
पुलिस जांच में सामने आया कि घटना के समय पिता अर्जुन घर पर मौजूद नहीं था। बच्चों के मामा ने एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस मामले की छानबीन जुटी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने धीरे-धीरे कहानी की परतें खोल दीं। जांच अधिकारियों ने पाया कि हत्या सुनियोजित थी और घरेलू विवाद इसकी वजह बना।
यह है घटनाक्रम: घटना ढेबरुआ थानाक्षेत्र में परसा देवाईचपार में 26 जुलाई 2017 को घटी थी। अभियोजन कथानक के अनुसार थाना त्रिलोकपुर क्षेत्र के गांव मुड़िला बक्शी निवासी प्रदीप प्रजापति उर्फ छोटू ने ढेबरुआ थाने पर तहरीर देकर कहा कि 26 जुलाई 2017 को सुबह उसके चचेरे भाई ढिल्लन ने बताया कि तुम्हारे भांजे सुरेंद्र व वीरेंद्र की लाश ग्राम परसा देवाइचपार गांव के पश्चिम स्कूल के पास तालाब में मिला है तथा बहन अनीता और भांजी लक्ष्मी लापता हैं।
इस सूचना पर वह अपने बहन के गांव देवाईचपार पहुंचा, जहां पोखरी के किनारे दोनों बच्चों मिली। प्रदीप ने आरोप लगाया था कि अनीता से उसके पति अर्जुन और ससुर राम लौटन से अक्सर झगड़ा हुआ करता था। दोनों भांजों की हत्या तथा अनीता व लक्ष्मी को इन्हीं लोगों ने गायब किया है। पुलिस ने तहरीर पर हत्या की प्राथमिकी दर्ज करने के बाद जांच शुरू की।
जांच में बच्चों की हत्या उनकी मां अनीता द्वारा ही करने की बात सामने आई और उसको बचाने के लिए उसके बहनोई बसंतलाल प्रजापति ने उसको संरक्षण दिया। विवेचना की समाप्ति कर पुलिस ने अनीता के विरुद्ध हत्या करके सबूत छिपाने और बसंतलाल प्रजापति के खिलाफ कानून से बचाने के लिए अनीता को संरक्षण देने के अपराध में आरोप-पत्र मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में प्रेषित किया। इसके बाद सुनवाई आगे बढ़ी।