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Siddharthnagar News: पितृपक्ष में बाजारों में सन्नाटा, 70 फीसदी घटा कारोबार

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-जिले में 20 करोड़ की अपेक्षा पांच कराेड़ पर सिमटा बाजार
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संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। पितृपक्ष में बाजारों में चहल-पहल कम हो गई है। बर्तन, रेडिमेड गारमेंट से लेकर सराफा बाजार तक में सन्नाटा पसरा है। कपड़ों की दुकान पर 50 से 60 फीसदी तो सराफा कारोबार 25 फीसदी तक सिमट गया है। इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक का बाजार भी 40 प्रतिशत तक गिरा है। इस हिसाब से रोजाना होने वाले पूरे जिले के कारोबार का आंकड़ा देखें तो करीब 20 करोड़ से सिमट कर पांच करोड़ तक आ गया है। गारमेंट के दुकानदार छूट और सेल के ऑफर देकर माल खपाने में जुटे हैं, ताकि उनका रुटीन का खर्च निकल सके। कपड़े वाली गली में किसी प्रकार की चहल-पहल नहीं है।
दुकानों पर इक्का-दुक्का ग्राहक ही नजर आए। एक दुकान पर तो कई दुकानदार बैठकर बातचीत कर रहे थे। दशहरा और दिवाली के बाजार की तैयारियों में भी जुटे थे। पितृपक्ष में लोग नए कपड़े भी कम ही खरीदते हैं। कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि पितृपक्ष में दुकान का खर्च निकाल पाना मुश्किल हो रहा है। इसलिए, छूट और अन्य ऑफर देकर किसी तरह बिक्री बढ़ा रहे हैं। थोक में कपड़ों के बाजार का टर्नओवर आम दिनों में करीब 10 करोड़ रुपये का है, जो पितृपक्ष में घटकर चार से पांच करोड़ ही रह गया है। दुकानदार इस समय को दूसरे काम में लगा रहे हैं। कोई नया माल भरने में लगा है, तो कोई आने वाले सीजन को देखते हुए दुकान की सफाई कर रहा है। उन्हें उम्मीद है पितृपक्ष के बाद ग्राहकों की भीड़ बढ़ेगी।
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बोले व्यापारी
रक्षाबंधन और तीज के बाद से ही कपड़े का मार्केट डाउन है। बिक्री भी आधी हो गई है। इवेंट और सेल के जरिये बड़े व्यापारी अपने नुकसान की भरपाई कर रहे हैं, लेकिन छोटे व्यापारियों को काफी नुकसान हो रहा है। अब आने वाले त्योहार और लगन के सीजन से काफी उम्मीद है।
-अनिल सिंह, व्यापारी
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सितंबर की शुरुआत से ही इलेक्ट्रॉनिक सामान की बिक्री बहुत कम है। रिटेल में बहुत कम ग्राहक आ रहे हैं। जिनके यहां कोई काम चल रहा है, वहीं कुछ खरीदारी कर रहे हैं। इस बीच व्यापारी दुकानों की रेनोवेशन कर रहे हैं। आगे आने वाले सीजन से बहुत उम्मीद है।

-सुनिल, इलेक्ट्रॉनिक व्यापारी
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धर्माचार्य बोले-पितृपक्ष में खरीदारी शुभ नहीं
पितृपक्ष में नए वस्तुओं की खरीदारी को सही नहीं माना गया है। लोहा, गहने, भूमि, वाहन व सरसों का तेल खरीदना अच्छा नहीं माना जाता है। अगर खरीदारी करते हैं तो दान जरूर करें। चावल, वस्त्र व तिल खरीदकर दान करना चाहिए।
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-सदाशिव मिश्र, आचार्य
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वैसे तो पितृ पक्ष में खरीदारी करने का वर्णन कहीं नहीं है, लेकिन मान्यता है कि स्वयं के लिए कुछ भी नहीं खरीदना चाहिए, क्योंकि पूर्वज प्रत्येक खरीदारी में दान करने की ही उम्मीद लगाते हैं। जिनके पिता जीवित हैं, वह कुछ भी खरीद सकता है। जिसको श्राद्ध करना है, वह उन्हीं वस्तुओं की खरीदारी करता है, जिसको दान करना होता है।
-अच्युत रामानुजाचार्य, आचार्य
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