सिद्धार्थनगर। दिल्ली में हुए बम ब्लास्ट के बाद कई जांच एजेंसी संदिग्ध गतिविधि वालों की धर-पकड़ में लगीं हैं। प्रदेश के कई हिस्सों से लगातार गिरफ्तारियां हो रही है। इसमें नेपाल बॉर्डर भी अछूता नहीं है।
सूत्रों की मानें तो नेपाल बॉर्डर एरिया के इलाके में धार्मिक स्थल मदरसा आदि में स्लीपर सेल के रूप में युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिन्हें देश विरोधी गतिविधियों में उपयोग किया जा सकता है।
सीमा से सटे भारतीय गांवों में भी एजेंसियों ने निगरानी बढ़ाई है। मदरसों में आने-जाने वालों की लिस्ट तैयार हो रही है। किराएदारों का दोबारा सत्यापन किया जा रहा है और बॉर्डर रोड से सटे घरों व दुकानों पर भी नजर है।
सूत्र बताते हैं कि कई बार बॉर्डर के भारतीय हिस्से को रहने और नेपाल के हिस्से को ऑपरेशन बेस की तरह इस्तेमाल किया जाता था। यही वजह है कि खुफिया टीमें रोजाना स्थानीय मुखबिर नेटवर्क से रिपोर्ट ले रही हैं।
खुफिया एजेंसियों की ताजा जानकारी में सामने आया है कि नेपाल में सीमा से सटे कई मंदिरों और मदरसों को स्लीपर सेल तैयार करने के लिए ‘कवर’ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। धार्मिक गतिविधियों के नाम पर इकट्ठा होने वाले लोग आसानी से शक से बच जाते हैं, और इन्हीं स्थानों का उपयोग संपर्क, मीटिंग और लॉजिस्टिक नेटवर्क तैयार करने में किया जा रहा है।
पूर्व में पकड़े गए कई संदिग्धों ने माना कि नेपाल में ऐसे कई ठिकाने हैं, जहां से भारत विरोधी मूवमेंट चलाए जा रहे हैं और बॉर्डर को ‘सेफ कॉरिडोर’ की तरह इस्तेमाल किया जाता है।
खुली सीमा का देश-विरोधी तत्व पहले भी लाभ उठा चुके हैं। बीते वर्ष पाकिस्तानी महिला सीमा हैदर ने जिले के ही खुनुवां-नेपाल बॉर्डर से देश में प्रवेश किया था। इसकी बाकायदा ट्रैवल हिस्ट्री भी सामने आई थी। वहीं, पूर्व में हायर लेवल जांच एजेंसियों के हाथ लगे संदिग्ध यह बता चुके हैं कि वह सिद्धार्थनगर जिले की सीमा से सटे नेपाल के हिस्से में बैठकर देश विरोधी गतिविधियों को संचालित कर रहे थे।
वहीं से उनका मूवमेंट होता था। इसके अलावा वर्ष 2021 में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़ा संदिग्ध पकड़ा गया जो शोहरतगढ़ सीमावर्ती इलाके के अत्री का निवासी था। यूपी एसटीएफ ने उसके ट्रेनिंग कमांडर होने का दावा किया था। उसके पास से कई देश विरोधी कागजात बरामद हुए थे। दिल्ली में हुए धमाके के बाद जांच एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं।
बॉर्डर पर अलर्ट मोड में रहती है सुरक्षा एजेंसी: सीमा पर तैनात बलों से बात करने पर जानकारी मिली कि नेपाल से आने वाले हर वाहन और पैदल चलने वाले को रोककर नाम, पता और यात्रा का उद्देश्य पूछा जा रहा है। बॉर्डर पिलर के आसपास विशेष निगरानी की जा रही है क्योंकि कई संदिग्ध पकड़े जाने से पहले इन्हीं पिलर क्षेत्रों से नेपाल की ओर फिसल जाते थे।
इन आतंकियों के जुड़े रहे बॉर्डर से तार: नेपाल सीमा आतंकियों का रिश्ता भी गहरा है। इस बात की पुष्टि गिरफ्त में आये आतंकी भी करते हैं। एजेंसियों के हाथ लगे संदीप धोनी पूछताछ में सीमा से सटे इलाके में नेपाल में बैठकर देश विरोधी संचालित करने की बात कबूल की थी।
वहीं, 05 मार्च 2010 को इंडियन मुजाहिद्दीन का खास गुर्गे सलमान बढ़नी बॉर्डर से पकड़ा गया था। 10 जून 2010 को बब्बर खालसा ग्रुप का माखन सिंह बढ़नी बॉर्डर से पकड़ा गया।
अक्टूबर 2022 में: राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए के इनपुट के बाद भवानीगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में यूपी एटीएस की टीम ने छापा मारा। वह अपने साथ एक संदिग्ध को पकड़ कर ले गई। टीम का दावा है कि पकड़ा गया संदिग्ध पीएफआई संगठन से जुड़ा हुआ है।