दिल्ली में रखा पिपरहवा रत्न। श्रोत प्रशासन। स्रोत विज्ञप्ति
सिद्धार्थनगर। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की ओर से कपिलवस्तु के पिपरहवा स्तूप की खुदाई में निकले रत्नों की रूस के काल्मिकिया में प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
24 सितंबर से एक अक्टूबर तक आयोजित होने वाली प्रदर्शनी में शामिल प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य करेंगे। वह प्रतिनिधिमंडल के साथ 23 सितंबर को भारतीय वायुसेना के विमान से रूस रवाना होंगे। सूचना अधिकारी बीएल यादव ने बताया है कि यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय से उपलब्ध कराई गई है। कपिलवस्तु के पिपरहवा में खोदाई में निकले पुरातात्विक अवशेषों की 127 वर्ष बाद भारत वापसी हुई है। अंग्रेज अफसर पेपे की ओर से पिपरहवा में 1898 में खोदाई में निकलवाई गईं कलाकृतियों को हांगकांग में नीलाम किया जाना था। पेपे के वंशज इन बौद्धकालीन अवशेषों की नीलामी कर रहे थे। पिपरहवा रत्न के नाम से प्रसिद्ध अवशेषों की केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय के प्रयास से भारत वापसी हुई थी। अब भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों का संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से 24 सितंबर से एक अक्टूबर तक (काल्मिकिया) रूस में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का प्रदर्शन आयोजित कर रहा है।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बताया कि कपिलवस्तु अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय यात्रा भारत की साॅफ्टपावर और सांस्कृतिक कूटनीति का प्रभावी माध्यम बनेगी। बताया कि इससे पूर्व थाईलैंड और वियतनाम में भगवान बुद्ध के अवशेषों की प्रदर्शनी आयोजित की जा चुकी है।
थाईलैंड और वियतनाम की सफलता ने वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाई है। उन्होंने बताया कि रूस में होने वाली प्रदर्शनी इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाएगी और भारत की सांस्कृतिक छवि को और निखरेगी।