सिद्धार्थनगर। नेपाल के पहाड़ समेत जिले में तीन दिनों से हो रही बारिश के चलते नदियों में उफान आ गया है। बूढ़ी राप्ती नदी खतरे के लाल निशान को पार कर गई है, वहीं राप्ती भी तबाही मचाने को आतुर दिख रही है।
नदियों के तेजी से बढ़ने जलस्तर से किनारे बने बांधों पर दबाव बढ़ गया है, जिससे उनके टूटने का खतरा मंडराने लगा है। इससे जोगिया और उसका क्षेत्र में बांधों पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए विभागीय अफसर बांधों की निगरानी कर रहे हैं। वहीं बाढ़ पीड़ित तीन वर्ष पूर्व बांध टूटने से मची तबाही के भयावह मंजर को याद कर सहम जा रहे हैं।
लगातार हो रही बारिश के चलते जिले में बूढ़ी राप्ती नदी का जलस्तर बीते 24 घंटे के अंदर खतरे के लाल निशान 85.650 मीटर को पार कर 86.190 मीटर पर पहुंच गया। नदी खतरे के निशान से 54 सेमी ऊपर बहने से जोगिया और उसका क्षेत्र के कई गांव पर बाढ़ का भयावह खतरा मंडराने लगा है जबकि वर्तमान में उसका क्षेत्र में नदी किनारे स्थित हथिवड़ताल गांव के तिवारीडीह समेत कई गांव जलमग्न हो गए है। इससे लोगों को बांध से घर तक जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है जबकि यहां स्थित प्राथमिक विद्यालय नदी के पानी से चारों तरफ से घिर गया है।
वहीं, घोघी नदी भी खतरे के निशान से 87.00 मीटर से 50 सेमी ऊपर 87.50 मीटर पर बहने लगी है। इससे आसपास के भलुहा आदि गांव चारों तरफ बाढ़ के पानी से घिर गए हैं।
वहीं राप्ती नदी के बढ़ते जलस्तर से डुमरियागंज और बांसी क्षेत्र में नदी के आसपास के गांवों के लोगों में भय व्याप्त हो गया है जबकि जोगिया के कछार क्षेत्र में संगलदीप गांव के पानी से घिर जाने से लोग निजी नाव से आवागमन करने को मजबूर है।
क्षेत्र के निवासी नागेश, रविंद्र कश्यप, महेश का कहना है कि जलस्तर कम होने पर कटान का खतरा रहता है और बढ़ने पर बाढ़ की तबाही झेलनी पड़ती है।
डेढ़ सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही राप्ती : बांसी। राप्ती नदी बांसी में बृहस्पतिवार की सुबह आठ बजे से ठहरने के बाद शाम चार बजे से फिर बढ़ने लगी है। नदी के बढ़ने की रफ्तार डेढ़ सेंटीमीटर प्रति घंटा है। इन दिनों लगातार नेपाल की पहाड़ियों पर हो रही बारिश से राप्ती के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है। बृहस्पतिवार की सुबह आठ बजे से नदी के ठहर जाने से लोग राहत की सांस ले रहे थे, लेकिन शाम चार बजे से नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी के आसपास बसे लोगों की चिंता बढ़ गई है। केंद्रीय जल आयोग के बाढ़ व पूर्वानुमान केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार बांसी में राप्ती नदी का जलस्तर सुबह आठ बजे 84.220 था और इसी पर नदी ठहर गई, लेकिन शाम चार बजे नदी फिर बढ़ने लगी। शाम पांच बजे नदी का जलस्तर बढ़कर 84.240 हो गया है जो चेतावनी बिंदु से 24 सेमी ऊपर और खतरे के निशान से 66 सेंटीमीटर नीचे है। अब भी नदी के बढ़ने का क्रम जारी है। चेतावनी बिंदु 83.900 है और खतरे का स्तर 84.900 है। नदी का जल स्तर बढ़ता देख सिंचाई विभाग के अभियंताओं की निगरानी बढ़ गई है। जानकारों का मानना है कि यदि नेपाल में बारिश हुए तो नदी का जलस्तर और बढ़ेगा। राप्ती नदी का तेजी से बढ़ता जलस्तर देख नदी के तट पर बसे लोग काफी चिंतित है ।
जर्जर बांधों में होल, कैसे कम होगा बाढ़ के पानी का दबाव : इधर कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश से राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी के तट पर स्थित सभी बांध में रेनकट और रैट होल हो गए हैं। जो सिंचाई विभाग के दावों की पोल खोल रहे हैं। लोगों का कहना है कि सभी बांध जर्जर हैं। इन बांधों में अनगिनत रेन कट और रैट होल हैं जो बांध के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।
बांसी-डुमरियागंज, बांसी-पनघटिया, सोनखर-हाटा, नरकटहा-सोनखर, जमींदारी बांध सहित सभी बांध में रेन कट और रैट होल हैं। हालत यह है कि डुमरियागंज बांसी बांध पर बांसी कस्बे में सहायक अभियंता का कार्यालय है और कार्यालय के पीछे बांध पर काफी रेन कट और रैट होल हैं जो खतरे को दावत दे रहे हैं।