भनवापुर। धान को सरकारी खरीद केंद्र पर बेचना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसा इसलिए कि इसके लिए मात्र दो ही केंद्र बनाए गए हैं। करीब 25 किमी दूरी तय कर शाहपुर मंडी समिति तक पहुंचाना है।
ऐसे में किसान अपने उपज को आढ़तियों के हाथों औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हैं। ऐसे में बिचौलिये मस्त है और किसान अपने कड़ी मेहनत और पसीने की गाढ़ी कमाई का उचित दाम नहीं मिलने से पस्त हैं।
क्षेत्र के किसानों की समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सूखा, असमय बारिश और यूरिया की किल्लत झेलने के बाद जैसे-तैसे कर उन्होंने धान की फसल बचाई। कटाई कर कुछ खेत तो कुछ किसानों के दरवाजे पर फसल पड़ी हुई हैं।
इसके बाद अब किसानों को अपनी उपज बेचने में भी मशक्कत करनी पड़ रही है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का दावा पूरी तरह खोखला साबित हो रहा है। अगर किसी किसान को अपने उपज को सिंगार जोत, नावडीह, गागापुर, परसोहिया तिवारी, बिजौरा, जूड़ीकुइयां आदि जगहों से शाहपुर मंडी पहुंचाना है तो यह काफी मुश्किल है।
वहां एक तो भाड़ा अधिक लग जाएगा, वहीं दो से तीन दिन तक रुकना भी पड़ता है। ऐसे में हम अपने उपज को आढ़तियों के हाथों 1800 से 1900 रुपये प्रति क्विंटल बेचने को मजबूर हैं।
किसानों ने सरकारी धान खरीद केंद्र को मात्र दिखावा और किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि शाहपुर मंडी में 10 किमी क्षेत्र के किसान ही अपनी उपज बेच सकते हैं।
बाकी आढ़तियों की ओर से किसानों के खरीदे गए औने-पौने दामों पर धान की उपज को सरकारी दामों में बेचकर मोटी कमाई की जा रही है।
किसानों का कहना है कि क्षेत्र के प्राइवेट धान खरीद करने वाले आढ़तियों के द्वारा क्षेत्र के किसानों का आधार, खतौनी लेकर खुद ऑनलाइन पंजीकरण करा कर तहसील से सत्यापन भी करा दिया जाता है। बाद में उन्हीं या अन्य किसानों का औने-पौने दामों पर धान खरीदा गया धान सरकारी खरीद केंद्र पर सेटिंग के कारण आसानी से तय रेट में बिक जाता है।
जिसका सीधा फायदा बिचौलियों को होता है, वहीं किसान मेहनत के बाद भी हाथ मलते रह जाते हैं।