सिद्धार्थनगर। मोहाना थाना क्षेत्र के उजी गांव के पास पूर्ति विसर्जन के दौरान हुई वारदात में आरोपी पुलिस कर्मियों की परदेदारी उन पर भारी पड़ रही है। जिस केस के डर से वह रजनीश को छोड़कर भागे थे, उसी केस में उन्हें सलाखों के पीछे जाना पड़ा। बेहोश रजनीश को मृत समझ केस में फंसने के डर से उसे छोड़कर बगैर आला अफसरों को बताए वे भाग निकले। इसका नतीजा रहा कि रजनीश जिंदगी और मौत से जूझ रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस की पूछताछ में चारों आरोपी पुलिसकर्मियों ने इसका खुलासा किया है। हालांकि कोई अफसर पूछताछ के संबंध में कुछ बताने में परहेज कर रहा है।
आरोपी पुलिसकर्मी राजन सिंह, मंजीत सिंह, अभिषेक गुप्त और मनोज यादव पर अपहरण और हत्या के प्रयास का केस दर्ज है। इसमें पहले राजन सिंह और मनोज यादव को हिमाचल के मनाली शहर से स्पेशल टीम ने पकड़ा।
वहीं, मंजीत सिंह और अभिषेक गुप्ता को उनके तैनाती वाले मोहाना थाना क्षेत्र से तीन नवंबर को दबोचा गया, वह किसी से मिलने के लिए क्षेत्र में पहुंचे थे।
सूत्रों की मानें तो पुलिस की साथ अलग-अलग टीम जिसमें आलाधिकारी भी शामिल थे, बारी-बारी करके पुलिसकर्मियों से पूछताछ की। फिल्मी अंदाज में एक-दूसरे को सिपाहियों की ओर से दिए गए गलत जवाब बताए, लेकिन सभी पुलिस कर्मियों का एक जवाब था।
मृत समझकर बिना बताए भाग गए आरोपी: सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी पुलिसकर्मियों ने बताया कि मूर्ति का विसर्जन जल्द संपन्न करना था। मूर्ति रुकी हुई थी, उसे जल्द ले जाने के लिए बार-बार आग्रह किया जा रहा था। उसी में किसी ने बताया कि डोला का अगुवा रजनीश पटेल है, उनसे बोलिए वह कहेंगे तो आगे बढ़ेगा। जब रजनीश से बात हुई तो उनके बीच कुछ बात हो गई। लेकिन पूरे विश्वास के साथ रजनीश पुलिस कर्मियों की बाइक पर बैठ गया।
पूछताछ में पुलिस कर्मियों ने बताया कि उसे लेकर चले थे आसानी से, लेकिन उन्हें पता नहीं था कि रजनीश बाइक से छलांग लगा देगा। रजनीश के छलांग लगाने के बाद चारों ने गाड़ी कुछ दूर आगे ले जाकर रोकी।
दोबारा जाकर जब देखा तो रजनीश अचेत था, उसके शरीर पर कोई मूवमेंट नहीं था। इससे चारों डर गए, उनको लगा कि शायद रजनीश दम तोड़ चुका है। अगर यह बात बाहर आई तो हम सब हत्या के केस में फंस जाएंगे। बात बाहर न आए, इसलिए सभी थानाध्यक्ष को बिना बताए वहां से निकल गए। उन्हें क्या पता था कि कैमरे में कैद हरकत और रजनीश को ले जाते वक्त एक युवक की ओर से की गई बातचीत की रिकॉर्डिंग इस बात को पुष्ट कर देगी कि चारों पुलिसकर्मी से रजनीश की लेकर जाने को लेकर हुई तीखी झड़प हुई थी और वे गाड़ी पर बिठाकर लेकर जा रहे हैं।
जिस वारदात पर परदा डालने के लिए वह रजनीश को अस्पताल ले जाने के बजाय छोड़कर भागे थे। वह बात बाहर आ गई। इससे न सिर्फ अपहरण व हत्या के मुकदमे में आरोपी बने बल्कि अपराधियों की तरह उनपर भी 25-25 हजार का इनाम घोषित और भगोड़ा घोषित कर दिए गए। 10 दिन तक भागते रहे, अंत में अपने ही विभाग के लोगों ने उन्हें दबोच लिया। जिस अपराध के सिर पर आने से बचने के लिए भागे थे, उसी मामले में सलाखों के पीछे पहुंच गए।
पुलिस कर्मियों इसे एक हादसा बता रहे हैं, हालांकि अभी रजनीश का होश में आना बाकी है और उसके स्वस्थ होने के बाद ही असल वजह सामने आएगी।